Thursday, May 1, 2014

उन्नति प्रदायक दुर्गा शाबर मन्त्र

~ उन्नति प्रदायक दुर्गा शाबर मन्त्र ~
====================
“ ॐ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंह - वाहिनी । बीस - हस्ती भगवती , रत्न-मण्डित सोनन की माल ।
उत्तर-पथ में आप बैठी, हाथ सिद्ध वाचा ऋद्धि-सिद्धि। धन-धान्य देहि देहि - कुरु कुरु स्वाहा।”
विधिः- उक्त मन्त्र का सवा लाख जप कर सिद्ध कर लें । फिर आवश्यकतानुसार श्रद्धा से एक माला जप करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं । लक्ष्मी प्राप्त होती है, नौकरी में उन्नति और व्यवसाय में वृद्धि होती है ।

Shabar Mantra Islami

Shabar Mantra Islami...
बिस्मिल्ला अल्ला साव की बंदगी नवी साव का नूर 
तसवी खुवाजा खिजर की कुल आलम हाजर हजूर 
चार यार बराबर चले पंजवे पाक रसूल 
करो मेरा मकसूद हासिल 
या गफ़ूर या गफ़ूर या गफ़ूर...
 देव आपकी नहीं सुनता तो आप इसे सिद्ध करे और एक मिठाई के डबे में कुश मीठे चावल जो पीले रंग के हो रख दे और एक खत लिखे उस देवता के नाम और केसर से कागज पेलिखना है उस में आपकी जो भी मनोकामना हो लिख दे जा आप जैसा चाहते है और किसी नदी पे जाकर इसमंत्र का 5 माला जप करे और उस कागज को डबे में चावल के साथ रख के कहे हे खुवाजा जी आप मेरी बातइस देव तक पहुंचा दे यह मुझे जल्दी सिद्ध हो और 5 माला के बादउस डबे को जल प्रवाह करदे आपकी बात उस देवता तक पहुँच जाएगी अगर वह फिर भी आप की बात नहीं सुनेगा तो खुवाजा जी उसे जल देना बंद कर देते हैउसे आपकी बात का मान रखना ही पढ़ेगाइस मंत्र से प्रतक्ष आवाज आती है और आपको बहुत से रहस्य से अवगत करा देती है ...


शीघ्र फलदायी होते है शाबर मन्त्र

~ शीघ्र फलदायी होते है शाबर मन्त्र ~
=====================
‘शाबर’ का प्रतीक अर्थ होता है ग्राम्य, अपरिष्कृत । ‘शाबर-तन्त्र’ – तन्त्र की ग्राम्य-शाखा है । इसके प्रथम प्रवर्तक भगवान् शंकर है, किन्तु जिन सिद्धों ने इसको आगे बढ़ाया, वे परम-शिव-भक्त अवश्य थे । मानव गुरुओ में गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मछन्दर नाथ ‘शाबर-मन्त्र’ के जनक माने जाते हैं । अपने तप-प्रभाव से वे भगवान् शंकर के समान पूज्य माने जाते हैं । अपनी साधना के कारण वे मन्त्र-प्रवर्तक ऋषियों के समान विश्वास और श्रद्धा के पात्र हैं । ‘सिद्ध’ और ‘नाथ’ सम्प्रदायों ने परम्परागत मन्त्रों के मूल सिद्धान्तों को लेकर बोल-चाल की भाषा को मन्त्रो का दर्जा दिया गया ।
‘शाबर’-मन्त्रों में ‘आन’ और ‘शाप’, ‘श्रद्धा’ और ‘धमकी’ - दोनों का प्रयोग किया जाता है । साधक ‘याचक’ होता हुआ भी देवता को सब कुछ कहता है, उसी से सब कुछ कराना चाहता है । आश्चर्य यह है कि उसकी यह ‘आन’ भी काम करती है । ‘आन’ का अर्थ है – सौगन्ध ।
शास्त्रीय प्रयोगों में उक्त प्रकार की ‘आन’ नहीं रहती । बाल-सुलभ सरलता का विश्वास ‘शाबर मन्त्रों का साधक मन्त्र के देवता के प्रति रखता है । जिस प्रकार अबोध बालक की अभद्रता पर उसके माता-पिता अपने वात्सल्य-प्रेम के कारण कोई ध्यान नहीं देते, वैसे ही बाल-सुलभ ‘सरलता’ और ‘विश्वास’ के आधार पर ‘शाबर’ मन्त्रों की साधना करना वाला सिद्धि प्राप्त कर लेता है ।
‘शाबर’-मन्त्रों में संस्कृत, प्राकृत और क्षेत्रीय – सभी भाषाओं का उपयोग मिलता है । किन्हीं-किन्हीं मन्त्रों में संस्कृत और मलयालय, कन्नड़, गुजराती, बंगला या तमिल भाषाओं का मिश्रित रुप मिलेगा, तो किन्हीं में शुद्ध क्षेत्रीय भाषाओं की ग्राम्य-शैली और कल्पना भी मिल जायेगी ।
भारत के एक बड़े भू-भाग में बोली जाने वाली भाषा ‘हिन्दी’ है । अतः अधिकांश ‘शाबर’ – मन्त्र हिन्दी में ही मिलते हैं । इस मन्त्रों में शास्त्रीय मन्त्रों के समान ‘षडङ्ग’ - ऋषि, छन्द, वीज, शक्ति, कीलक और देवता - की योजना अलग से नहीं रहती, अपितु इन अंगों का वर्णन मन्त्र में ही निहित रहता है । इसलिए प्रत्येक ‘शाबर’ मन्त्र अपने आप में पूर्ण होता है । उपदेष्टा ‘ऋषि’ के रुप में गोरखनाथ जैसे सिद्ध-पुरुष हैं । कई मन्त्रों में इनके नाम लिए जाते हैं और कइयों में केवल ‘गुरु के नाम से ही काम चल जाता है ।
‘पल्लव’ (मन्त्र के अन्त में लगाए जाने वाले शब्द) के स्थान में ‘शब्द साँचा पिण्ड काचा, फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा’ – वाक्य ही सामान्यतः रहता है । इस वाक्य का अर्थ है “शब्द ही सत्य है, नष्ट नहीं होता । यह देह अनित्य है, बहुत कच्चा है । हे मन्त्र ! तुम ईश्वरी वाणी हो (ईश्वर के वचन से प्रकट हो)” इसी प्रकार के या इससे मिलते-जुलते दूसरे शब्द इस मन्त्रों के ‘पल्लव’ होते हैं

सर्व-कार्य-कारी शाबर मन्त्र

~ सर्व-कार्य-कारी शाबर मन्त्र ~
=================
१॰ “ॐ वीर बजरङ्गी, राम-लक्ष्मण के सङ्गी, जहाँ-जहाँ जाए, फतह के डङ्के बजाए, दुहाई माता अञ्जनि की आन।”
२॰ “ॐ नमो महा-शाबरी शक्ति मम अनिष्ट निवारय-निवारय मम कार्य-सिद्धि कुरु-कुरु स्वाहा।”
विधिः- यदि कोई विशेष कार्य करवाना हो अथवा किसी से अपना काम बनवाना हो तो कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व अथवा व्यक्ति-विशेष के पास जाते समय उक्त दो मन्त्रों में से किसी भी एक मन्त्र का जप करता हुआ जाए -कार्य में सफलता मिलेगी !

कामदेव का मन्त्र

~ श्री कामदेव का मन्त्र ~
==============
(मोहन करने का अमोघ शस्त्र)
धर्मशास्त्र में कामदेव को प्रेम, सौंदर्य और काम का देव माना गया है। इसलिए परिणय, प्रेम-संबंधों में कामदेव की उपासना और आराधना का महत्व बताया गया है। इसी क्रम में तंत्र विज्ञान में कामदेव वशीकरण मंत्र का जप करने का महत्व बताया गया है। इस मंत्र का जप हानि रहित होकर अचूक भी माना जाता है। यह मंत्र है -
“ॐ नमो भगवते काम-देवाय श्रीं सर्व-जन-प्रियाय सर्व-जन-सम्मोहनाय
ज्वल-ज्वल, प्रज्वल-प्रज्वल, हन-हन, वद-वद, तप-तप,
सम्मोहय-सम्मोहय, सर्व-जनं मे वशं कुरु-कुरु स्वाहा।”
विधि - उक्त मन्त्र का २१,००० जप करने से मन्त्र सिद्ध होता है।
तद्दशांश हवन-तर्पण-मार्जन-ब्रह्मभोज करे।
बाद में नित्य कम-से-कम एक माला जप करे।
इससे मन्त्र में चैतन्यता होगी और शुभ परिणाम मिलेंगे।
प्रयोग हेतु फल, फूल, पान कोई भी खाने-पीने की चीज उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित कर साध्य को दे।
उक्त मन्त्र द्वारा साधक का बैरी भी मोहित होता है। यदि साधक शत्रु को लक्ष्य में रखकर नित्य ७ दिनों तक ३००० बार जप करे, तो उसका मोहन अवश्य होता है।
कामदेव वशीकरण मंत्र
============
जब किसी व्यक्ति को किसी से प्रेम हो जाए या वह आसक्त हो। विवाहित स्त्री या पुरुष की अपने जीवनसाथी से संबंधों में कटुता हो गई हो या कोई युवक या युवती अपने रुठे साथी को मनाना चाहते हो। किंतु तमाम कोशिशों के बाद भी वह मन के अनुकूल परिणाम नहीं पाता। तब उसके लिए तंत्र क्रिया के अंतर्गत कुछ मंत्र के जप प्रयोग बताए गए हैं। जिससे कोई अपने साथी को अपनी भावनाओं के वशीभूत कर सकता है।
"ॐ नमः काम-देवाय। सहकल सहद्रश सहमसह लिए वन्हे धुनन जनममदर्शनं उत्कण्ठितं कुरु कुरु, दक्ष दक्षु-धर कुसुम-वाणेन हन हन स्वाहा"
विधि :- कामदेव के इस मन्त्र को सुबह, दोपहर और रात्रिकाल में एक-एक माला जप का करें। यह जप एक मास तक करने पर सिद्ध हो जाता है। मंत्र सिद्धि के बाद जब आप इस मंत्र का मन में जप कर जिसकी तरफ देखते हैं, वह आपके वशीभूत या वश में हो जाता है।

रोजगार प्राप्ति शाबर मन्त्र

~ रोजगार प्राप्ति शाबर मन्त्र ~
===

=============
" ॐ हर त्रिपुरहर भवानी बाला
राजा मोहिनी सर्व शत्रु ।
विंध्यवासिनी मम चिन्तित फलं
देहि देहि भुवनेश्वरी स्वाहा ।। "
विधि :- मंगलवार को अथवा रात्रिकाल में उपरोक्त मन्त्र का रुद्राक्ष की माला से 108 बार जप करें । इसके बाद नित्य इसी मन्त्र का स्नान करने के बाद 11 बार जप करें । इसके प्रभाव से अतिशीघ्र ही आपको मनोनुकूल रोजगार की प्राप्ति होगी ।
यह मन्त्र माँ भवानी को प्रसन्न करता है, साधना से पूर्व देवी का अपने सम्मुख उनका चित्र रखें और पंचोपचार पूजन करे।

तम्बाखू का नशा छुड़ाने की विधि

** तम्बाखू का नशा छुड़ाने
की विधि **
यदि आप तम्बाखू
की पुडिया आदि खाने के आदि हैं
और इससे छुटकारा पान चाहते हैं
तो ये विधि आसानी से
आपको इसके पार ले आएगी ...!!
आप रोज़ सुबह अपनी जेब में काजू रख
ले और जब भी आपको तम्बाखू खाने
का दिल करे आप अपनी जेब से काजू
निकाले और अपने पास खड़े अपने
मित्र या जो भी कोई है
उसको वो काजू दे और
उसको कहे ...."" मित्र आप काजू
खाओ मुझे ज़हर खाना है """ ध्यान
रखे ये बात कहना ज़रूरी है । दिन में
हर बार तम्बाकू खाते वक़्त ये कहे और
फी तम्बाकू के स्वाद पर गौर करे
की वो कम होता जाएगा .... 7
दिन के अन्दर आपको इसमें कोई
स्वाद नहीं आएगा और आप
आसानी से इससे मुक्त हो जायेंगे ।।
ये प्रयोग सिगरेट के साथ
भी किया जा सकता है । हाँ एक
बात ध्यान रखे जब
किसी को काजू देते वक़्त वो बात
कहे तो इसको मजाक में न कहे ।