Thursday, October 2, 2014

कुबेर का खजाना

कुबेर का खजाना
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जब भी हम अपनी दुकान के
या अपनी घर की आलमारी के
लॉकर को देखते हैं और उसमे हमे धन अलौकिक प्रकाश दिखता है
तो हमारी ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है, इसके
ठीक विपरीत यदि हमें अपने गल्ले या लॉकर
में धन संपदा में किसी भी तरह
की कमी दिखती है तो हम
कितने भी प्रसन्न हों, अचानक अवसाद आ जाता है.
ऐसा होना स्वाभाविक भी है,
क्योंकि हमारी जिम्मेदारी स्वयं तक
सीमित नही है, बल्कि हम अपने से
ज्यादा किसी और की महत्वाकांक्षाओं
की पूर्ति के लिये अपना जीवन
व्यतीत करते हैं. यदि हम अपनी दुकान के
गल्ले या घर के लॉकर में कुछ विशिष्ट वस्तुओं को राशि के अनुसार रख
दें और कुछ विशेष प्रक्रियाओं का पालन करें तो निश्चित
ही हमारे लॉकर में धन
सम्पदा की कमी नही होगी तथा घर ,परिवार
में ऐसी परिस्थितियां जैसे,किसी का अस्वस्थ
होना,कोई दुर्घटना का होना,कर्ज
का बढ़ना इत्यादि भी नही आयेंगी जिससे
संचित धन की हानि हो. प्रत्येक जातक
की लग्न कुंडली में एकादश भाव आय का भाव
है. इस भाव से सम्बंधित ग्रहों का उपाय कर उनसे सम्बंधित
तत्वों का उपयोग किया जाये तो निश्चित ही आय
बढ़ती है साथ ही अन्य भावों से तालमेल
बनाकर कुछ और उपाय किये जायें तो धन संचय बढ़ता है,और
किसी तरह की पारिवारिक बाधा से धन
हानि नही होती.
मेष : आपकी राशि का स्वामी मंगल है
तथा इस राशि के जातक केतु,शुक्र और सूर्य से प्रभावित होते हैं.
आपके घर के लॉकर या दुकान के गल्ले में एक सफेद कागज़ में
नीली स्याही की कुछ
बून्दें छिड़क कर उसमें सौ रुपये के नौ नोट मोड़कर रख दें. इसे
प्रत्येक शनिवार को बदलें. कालीजी के दर्शन
शनिवार की संध्या को करें.
वृषभ : आपकी राशि का स्वामी शुक्र है.
आप सूर्य,चंद्र और मंगल ग्रहों की अवस्था से
प्रभावित होते हैं. सात छोटे कागज़ों में स्वास्तिक बनाकर गुरुवार
को कुंकुम लगा कर रख दें. प्रतिदिन प्रात:काल एक नया स्वास्तिक
बना कर गल्ले या लॉकर में रखें और एक स्वास्तिक को गल्ले से
बाहर लिकाल लें और देवस्थान पर रख दें. इस
प्रक्रिया को चालीस दिन तक करें. बीस रुपये
के एक नोट को पीले कागज़ में बांध कर लॉकर में रख दें.
विष्णु भगवान का दर्शन गुरुवार को करें.
मिथुन : आप की राशि का स्वामी बुध है और
आप मंगल, राहु तथा गुरु से प्रभावित हैं. प्रत्येक मंगलवार
को हनुमान जी के मन्दिर में, हनुमान
चालीसा का पाठ करते हुए उनके पैर के अंगूठे, गदा और
पूंछ का स्पर्श कर सात सात बिन्दु एक सफेद कागज़ पर लगायें. इसे
उसी दिन अपने गल्ले में रख दें. हर मंगलवार को इसे
बदल दे,और पुराने कागज़ को जल में प्रवाहित कर दें. सोमवार
को शिवजी के दर्शन करें.
कर्क : आपकी राशि का स्वामी चंद्र है.
आप गुरु,बुध और शनि ग्रहों की स्थिति से प्रभावित होते
हैं. एक चाँदी की डिब्बी में
चूना रख कर उसे बन्द कर दें.
किसी भी सोमवार को इसे शिवालय में चढ़ाकर
शक्कर युक्त जल से शिव जी का अभिषेक करें. चूने
की ड्ब्बी को लाकर अपने गल्ले में रख दें.
घोड़े के खुर की मिट्टी को एक पुड़िया में बांध
कर शुक्रवार की सायंकाल अपने गल्ले में रख दें.
शुक्रवार को लक्ष्मी जी के दर्शन अवश्य
करें.
सिंह : आप की राशि का स्वामी सूर्य है
और आप केतु,शुक्र तथा सूर्य से प्रभावित हैं.
किसी भी बुधवार को पाँच रुपये के पाँच नोटों पर
खस का इत्र लगा कर गणेश जी को 21
दूबी के साथ अर्पित करे. नोटों को प्रसाद स्वरूप वापस ले
लें. उसी दिन इसे गल्ले में रख दे ‘ऊँ गं गणपतये नम:’
का उच्चारण करते हुए एक हरे धागे में 108 गाँठ बांध दे लॉकर में
श्री यंत्र बने एक सिक्के पर इसे लपेट दें. हर
पूर्णिमा के दिन इसे बदल दें.
कन्या : आपकी राशि का स्वामी बुध है और
आप सूर्य, चन्द्र और मंगल से प्रभावित जान पड़ते हैं. प्रतिदिन
एक डिब्बी में दो चम्मच दूध के अन्दर
चाँदी का चन्द्रमा डुबा कर उसे बन्द कर दें और अपने
गल्ले या लॉकर में रखें. इस प्रक्रिया को आठ दिन दोहराने के पश्चात
चाँदी के चन्द्रमा को अपने लॉकर में सदैव के लिये रख लें.
गणेश जी को चढेÞ हुए पुष्प हर बुधवर को लाकर
अपने लॉकर में रखें.
तुला : आपकी राशि संचालित होती है शुक्र
से और आप के नियंता हैं मंगल,राहु और गुरु. आप यदि अपने लॉकर
में बीस रुपये के छ: नोट एक लाल कागज़ में बांध कर
गुलाब के ईत्र की बोतल के साथ शुक्रवार को रख देते हैं
और एक ताँबे का सूर्य बना कर उस पर लल चन्दन लगा कर उसे
प्रतिदिन धूप दिखाते हैं तो लाभ होगा.
लक्ष्मी चालीसा का पाठ दिन में
तीन बार अवश्य करें.
वृश्चिक : मंगल आपकी राशि का स्वामी है
और आप गुरु, शनि और बुध से नियंत्रित हैं. सोमवर को नौ बिल्व
पत्रों पर लाल चन्दन लगाकर शिवजी को अर्पित करें और
मंगलवार को इन पत्रों को एक हरे कागज़ में बांध कर अपने गल्ले में
रख दें. एक सफेद कागज़ पर मेहन्दी से गणेश
जी की आकृति बनाकर गल्ले में रखें और
उसे प्रतिदिन धूप दिखायें.
धनु : आपकी राशि का स्वामी गुरु है और
आप केतु, बुध और और सूर्य से संचालित होते हैं.
किसी भी शक्कर को पिघलाकर एक
लक्ष्मी जी की आकृति बना लें.
उसका श्री सूक्त से पूजन कर अपने गल्ले में रख दें.
अगले शुक्रवार को इस आकृति को किसी गाय को खिला दें.
इस प्रक्रिया को 20 शुक्रवार तक दोहरायें. एक अमेरिकन डायमंड
अपने गल्ले में रख दें.
मकर : आपकी राशि का स्वामी शनि है. आप
चन्द्र,सूर्य और मंगल से प्रभावित हैं. जलेबी रंग से
एक सफेद कागज़ पर ‘हं’ लिखकर हनुमान जी को एक
नारियल के साथ अर्पित करें. इस कागज़ को प्रसाद स्वरूप वापस लेकर
अपने लॉकर में रख दें. कुछ कार्बन के पेपर अपने गल्ले में रखें.
कुम्भ : आपकी राशि का स्वामी शनि है.
आप मंगल, राहु और गुरु से प्रभावित हैं.
किसी भी गुरुवार
को पीली सरसों की सात
पुड़िया बनाकर इसे लॉकर में रख दें. प्रतिदिन एक एक
पुड़िया को हटाकर जल में विसर्जित कर दें और
उसकी जगह नई पुड़िया रख दें. इस
प्रक्रिया को चालीस दिन तक दोहरायें.
लक्ष्मी नारायण मन्दिर में गुरुवार को दर्शन अवश्य करें.
मीन : आपकी राशि का स्वामी गुरु
है और आप गुरु,शनि तथा बुध द्वारा नियंत्रित हैं.
किसी भी शनिवार को शनि मंत्र का उच्चारण
करते हुए एक नीले धागे पर सात गाँठ बांधें. इस पने में
भिगा कर अपने लॉकर में रख दें. प्रतिदिन इस पने में भिगाकर वापस
लॉकर में रखें. शनिवार को इसे जल में प्रवाहित कर इस
प्रक्रिया को पुन: दोहराये. एक पीपल के पत्ते पर
हल्दी और चन्दन से श्रीं लिखकर लॉकर
में रख दें

दांत साफ करने का प्राचीन तरीका

दांत साफ करने का प्राचीन तरीका खोल
सकता है किस्मत भी
आपामार्ग (आंधीझाड़ा) की दातुन -
सभी लोगो मे प्रिय होना
अशोक वृक्ष की दातुन-गुणी पुत्र
पीपल वृक्ष की दातुन-समाज में सम्मान
बेर वृक्ष की दातुन - निरोगता
सालवृक्ष की दातुन - सम्मान में वृद्धि
देवदार की दातुन - सम्मान में वृद्धि
जामुन की दातुन - सभी लोगों में प्रिय
होना
अनार की दातुन - सभी लोगों में प्रिय
होना
कदम्ब की दातुन - धनलाभ
कनेर की दातुन - अन्नलाभ
शिरीष (सिरस) और करंज की दातुन -
लक्ष्मीवृद्धि, धन व कार्य सिद्धि,
सभी लोगों में प्रिय होना, अपने जाति बन्धुवर्ग में
मान्यता आदि फल देती हैं।
कत्था व बिल्व की दातुन - ऐश्वर्यवृद्धि
शमी की दातुन - शत्रुओं का नाश
अर्जुन व श्यामा की दातुन से शत्रुओं का नाश
होता है।
कैसे करें सही दातुन का चयन, क्या रखें
सावधानी
1. दातुन का चुनाव करते समय ध्यान रखें
कि किसी अंजान पेड़ की दातुन न लें।
2. पत्ते से युक्त दातुन भी ना लें।
3. सम संख्या में जोड़ दिखाई दे रहा हो, ऐसी दातुन
का प्रयोग भी न करें। 4.
आधी सूखी हुई, बिना छाल
वाली, बीच में से चिरी हुई
दातुन का प्रयोग भी न करें।

लोटे में जल और तिल डालकर करें ये उपाय, बढ़ सकती है इनकम :

तांबे के लोटे में जल और तिल डालकर करें ये उपाय, बढ़
सकती है इनकम :
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यदि कोई व्यक्ति धन संबंधी, स्वास्थ्य
संबंधी या घर-परिवार से संबंधित परेशानियों से त्रस्त
हैं तो यहां काले तिल के कुछ उपाय बताए जा रहे हैं। काले तिल
के इन उपायों से कुंडली के ग्रह दोष दूर हो सकते
हैं। शनि की साढ़ेसाती, ढय्या, राहु-केतु
के दोष, कालसर्प दोष या पितृ दोष हो तो काले तिल के इन उपायों से
लाभ प्राप्त हो सकता है।
उपाय: तांबे के लोटे में जल भरें और डालें काले तिल
नियमित रूप से ब्रह्ममुहूर्त में उठें, नित्यकर्म से निवृत्त
होकर पवित्र हो जाएं फिर
किसी भी शिव मंदिर जाएं। प्रतिदिन
शिवजी का विधि-विधान से पूजन करें। यदि विधिवत
पूजन करने में असमर्थ हैं तो प्रतिदिन तांबे लोटे में शुद्ध जल
भरें और उसमें थोड़े काले तिल डाल दें। अब इस जल को शिवलिंग
पर ऊँ नम: शिवाय मंत्र जप के साथ चढ़ाएं। ध्यान रखें कि शिवलिंग
पर जल पतली धार से चढ़ाएं और मंत्र का जप करते
रहें।
यदि आप महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हैं तो बेहद
फायदेमंद रहता है। ऐसा प्रतिदिन करें। जल चढ़ाने के साथ पुष्प
और बिल्व पत्र भी चढ़ाएं। इस उपाय से शुभ फल
प्राप्त हो सकते हैं।
शनिवार को करें काले तिल से ऐसा स्नान
- शनि दोषों और राहु-केतु के दोषों से बचने के लिए हर शनिवार
नहाने के पानी में थोड़े से काले मिलाएं और फिर उस
जल से स्नान करें। ज्योतिष
की पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस
उपाय से शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।
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यदि शनि की साढ़ेसाती या ढय्या का समय
चल रहा हो तो किसी पवित्र नदी में
प्रति शनिवार काले तिल प्रवाहित करना चाहिए। इससे शनि के
दोषों की शांति होती है। शिवलिंग पर काले
तिल चढ़ाने चाहिए। इससे शनि के दोष शांत होते हैं।

Wednesday, October 1, 2014

धन का अभाव नही होगा।

जिस सघन वृक्ष पर चमगादड़ों का स्थाई वास होता है,
उसकी छोटी-
सी लकड़ी ग्रहण काल में तोड़ लाएं।
इसे अपने कर्म स्थल
की कुर्सी अथवा गद्दी के निचे रखे इससे कभी धन का अभाव नही होगा।

सर्व-कार्य-सिद्धि जञ्जीरा मन्त्र

सर्व-कार्य-सिद्धि जञ्जीरा मन्त्र

सर्व-कार्य-सिद्धि जञ्जीरा मन्त्र
“या उस्ताद बैठो पास, काम आवै रास। ला इलाही लिल्ला हजरत वीर कौशल्या वीर, आज मज रे जालिम शुभ करम दिन करै जञ्जीर। जञ्जीर से कौन-कौन चले? बावन वीर चलें, छप्पन कलवा चलें। चौंसठ योगिनी चलें, नब्बे नारसिंह चलें। देव चलें, दानव चलें। पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।”
विधि- उक्त मन्त्र का जप शुक्ल-पक्ष के सोमवार या मङ्गलवार से प्रारम्भ करे। कम-से-कम ५ बार नित्य करे। अथवा २१, ४१ या १०८ बार नित्य जप करे। ऐसा ४० दिन तक करे। ४० दिन के अनुष्ठान में मांस-मछली का प्रयोग न करे। जब ‘ग्रहण’ आए, तब मन्त्र का जप करे।
यह मन्त्र सभी कार्यों में काम आता है। भूत-प्रेत-बाधा हो अथवा शारीरिक-मानसिक कष्ट हो, तो उक्त मन्त्र ३ बार पढ़कर रोगी को पिलाए। मुकदमे में, यात्रा में-सभी कार्यों में इसके द्वारा सफलता मिलती है।

शत्रु मारण मंत्र

शत्रु मारण मंत्र 

प्रत्येक जीव का इस संसार में बड़ा महत्व है, पूर्ण ज्ञान के कारण मनुष्य पृथ्वी का सबसे बुद्धिजीवी प्राणी रहा है, इसने अपने कार्य के लिए समय-समय पर कई नई खोज की, कई नए अविष्कार किए। किसी को मारण प्रयोग से, किसी को उच्चाटन से, किसी को मोहन मंत्रों से अपने कार्य के अनुरूप करा और उसे मनवांछित कार्य लिए। आइए देखें कुछ छोटे-छोटे प्रयोग।

1. शत्रु मारण मंत्र
ऊँ हुँ हुँ फट्‍ स्वाहा।
इस मंत्र के प्रयोग से आपके शत्रु भी आपका मित्र बन जाता है। आपकी शत्रुता का नाश हो जाता है। अश्विनी नक्षत्र में चार अँगुल लंबी घोड़े की हड्‍डी लेकर उपरोक्त दिए गए मंत्र को एक लाख बार जाप कर सिद्ध कर लें, फिर आवश्यकता पड़ने पर इस मंत्र को 21 बार पढ़कर इस हड्‍डी को शत्रु के मकान में गाढ़ देने से वह नष्ट हो जाता है।

2. ऊँ डं डां डिं डीं डु डू डें डैं डों डौं डं ड:।
अमुकस्य हन स्वाहा।
(अमुक के स्थान पर शत्रु का नाम लें)
यह मंत्र एक लाख बार जप करने से सिद्ध हो जाता है। आवश्यकता पड़ने पर मनुष्य की चार अँगुली लंबी हड्‍डी लेकर इस मंत्र से 108 बार अभिमंत्रित कर श्मशान भूमि में गाढ़ देने से शत्रु का विनाश हो जाता है।

नोट : पाठकों से विनम्र निवेदन है कि आप किसी के प्राण लेने, हानि पहुँचाने की दृष्टि से मंत्रों का उपयोग न करें। जब भी इसका प्रयोग करें, सर्वजन हिताय को ध्यान में रखकर करें।

धन सहित चोर पकड़ने का मंत्र

सरल लेकिन शक्तिशाली गोपनीय मंत्र

धन सहित चोर पकड़ने का मंत्र

ॐ ध्रूमाजक हुंकार स्फटिका दह दह ॐ

प्रयोग विधि- मंगलवार या रविवार क दिन कर्मटिका वृक्ष के नीचे मृगासन पर बैठकर गोधूली की लकड़ी जलाएं। सरसों तथा गुग्गल से उपरोक्त मंत्र पढ़ते हुए हवन करने से चोरी किए धन सहित चोर वापस आ जाता है।