Sunday, November 23, 2014

आप किस पक्षी की तरह हैं?

आप किस पक्षी की तरह हैं?
हमें आपके लिए यह दिलचस्प जानकारी मिली है।
सोचा आपके साथ शेयर की जाए। वैसे ज्योतिष
की बहुत सारी विद्याएं प्रचलन में हैं। उनमें से कुछ है
सामुद्रिक विज्ञान, अंगूठा विज्ञान, पंच
पक्षी विज्ञान और हस्तरेखा विज्ञान। ज्यादातर
लोग इस पर विश्वास करते हैं, क्योंकि यह कुंडली, ग्रह-
नक्षत्रों पर आधारित विद्या नहीं है जिसका कोई
आधार समझ में नहीं आता। खैर आप इसे पढ़ें और मजा लें...
यह बताना जरूरी है कि यह
जानकारी कितनी सही और गलत है यह
तो आपको ही तय करना है। हालांकि दक्षिण भारत में
पंच पक्षी सिद्धान्त प्रचलित है। इस ज्योतिष
सिद्धान्त के अंतर्गत समय को पांच भागों में बांटकर
प्रत्येक भाग का नाम एक विशेष पक्षी पर
रखा गया है। इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई कार्य
किया जाता है उस समय जिस
पक्षी की स्थिति होती है उसी के अनुरूप उसका फल
मिलता है। पंच पक्षी सिद्धान्त के अंतर्गत आने वाले
पांच पंक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और
मोर। आपके लग्न, नक्षत्र, जन्म स्थान के आधार पर
आपका पक्षी ज्ञात कर आपका भविष्य
बताया जाता है। माना जाता है कि इसी सिद्धांत
के आधार पर 13 पक्षियों का सिद्धांत
गढ़ा गया होगा।
1.रॉबिन (robin bird) : यदि आपका जन्म 21
जनवरी से 17 फरवरी के बीच हुआ है तो आप रॉबिन
नाम के एक सुंदर पक्षी हैं। इस पक्षी की छाती लाल
होती है। यह पक्षी अक्सर आपके घर के आसपास
दिखाई दे सकता है। गौरेया के आकार से बस
थोड़ा ही बड़ा होता है।
रॉबिन नाम का एक पक्षी होता है
जिसकी छाती लाल होती है तो आप हैं रॉबिन। देखने
में आप बहुत शांत हैं, लेकिन अंदर आग भरी हुई है। आग
का मतलब की हर चीज पर आपका नजरिया दूसरों से
अलग है, जो अक्सर लोगों के नजरिए से मेल
नहीं खाता। आप अपने घर-परिवार से बहुत प्यार करते
हैं, लेकिन आप का झगड़ालू स्वभाव आपको परिवार से
दूर कर सकता है।
2.गोल्डफिंच (goldfinch) : यदि आपका जन्म 18
फरवरी से 17 मार्च के बीच हुआ है तो आप हैं
गोल्डफिंच की तरह हैं। 'गोल्डफिंच' का अर्थ होता है
सोने का सिक्का। इसे सोन चिड़िया कहते हैं। यह
चिड़िया सोने की तरह है। यह पक्षी हमेशा सचेत
रहता है। बहुत भावुक लेकिन कलरफुल व्यक्तित्व। समूह में
रहकर ही आप सुरक्षा महसूस करते हैं। यही कारण है
कि आप में अकेले लड़ने की क्षमता का विकास
नहीं हो पाता। अपनी काबिलियत दिखाने के लिए
आपको दूसरों की सहायता की जरूरत पड़ती है।
3.हॉक (Hawk) : यदि आपका जन्मदिन 18 मार्च से 14
अप्रैल के बीच हुआ है तो आपका व्यक्तित्व हॉक
की तरह है। हॉक को हिन्दी में शिकरा, श्येन और बाज
कहते हैं। आत्मविश्वास से भरपूर और
शक्तिशाली व्यक्तित्व के चलते लोग आपके प्रभाव में
रहते हैं। कैसी भी कठिनाई हो, आप उसे अपने कौशल से
सुलझा लेते हैं। हमेशा आपका फोकस गोल पर रहता है।
शक्ति और साहस से भरपूर आपके व्यक्तित्व के प्रभाव से
सभी डरते हैं।
4.एल्बाट्रॉस (albatross) : यदि आपका जन्म 15 अप्रैल
से 12 मई के बीच हुआ है तो आप एल्बाट्रॉस हैं। यह एक
बड़ा समुद्री पक्षी होता है, जो बतख की तरह
तैरता है। यह पक्षी भी रहस्यमयी है। लगता है
कि आपका दिमाग द्वंद्व में ही रहता है। इस द्वंद्व के
चलते आपका दिमाग भटकता ही रहता है, फिर भी आप
वह ढूंढ ही लेते हैं, जो आप चाहते हैं। अदि आप बेकार
की बातों में उलझना छोड़ दें तो सुख, समृद्धि और
सफलता आपके लिए बहुत आसान है।
5.डव (Dove) : यदि आपका जन्म 13 मई से 9 जून के बीच
हुआ है तो आप डव पक्षी की तरह हैं। सफेद कबूतर
को डव कहते हैं। हिन्दी में कपोत। शांति और रोमांस
आपको पसंद है। जब यह ज्यादा हो जाता है तो लोग
आपकी इस बात का फायदा उठा सकते हैं।
सौम्यता और बौद्धिकता आपका स्वभाव है। आप
प्यारभरा जीवन जीना पसंद करते हैं। प्रकृति और
स्त्री से आप भरपूर प्रेम चाहते हैं।
6.ईगल (Eagle) : यदि आपका जन्म 10 जून से 7 जुलाई के
बीच हुआ है तो आप ईगल की तरह हैं। ईगल को हिन्दी में
चील या महाश्येन कहते हैं। आपके पास जबर्दस्त विजन
पॉवर है और इसका ठीक-ठीक इस्तेमाल
करना भी जरूरी है, तभी लोग आपकी इज्जत करेंगे।
हालांकि आप ऐसा करते भी हैं। आप एक जिम्मेदार
व्यक्ति हैं और आप फिजूल की हरकतों से दूर रहकर अपने
विरोधियों पर काबू पा लेते हैं। आपकी सोच बड़ी और
सपने ऊंचे हैं। इसे बनाए रखें। जरूरी है कि सिर्फ लक्ष्य पर
नजर रखें।
7.नाइटिंगेल (Nightingale) : यदि आपका जन्म 8 जुलाई
से 4 अगस्त के बीच हुआ है तो आप हैं नाइटिंगेल। इसे
हिन्दी में बुलबुल कहते हैं। कहीं भी जाने से पहले
ही आपके आने की सूचना चर्चा का विषय बन
जाती है। आपके पास बातें करने के लिए बहुत कुछ है।
आपका आकर्षक और रहस्यमयी व्यक्तित्व
सभी को प्रभावित करता है। आपके आसपास होने से
लोग खुश रहते हैं। आप में भरपूर ऊर्जा और उत्साह है।
8.किंगफिशर (kingfisher) : यदि आपका जन्म 5 अगस्त
से 1 सितंबर के बीच हुआ है तो आप किंगफिशर
पक्षी की तरह हैं। यह बहुत ही सुंदर पक्षी है
जिसकी पीठ नीले आसमानी रंग की, पेट
सुनहरा होता है और चोंच केसरिया कलर की। इसे
हिन्दी में 'रामचिरैया' कहते हैं, मतलब राम
की चिड़िया। आपका व्यक्तित्व भी इसी तरह रंग-
बिरंगा है। आप हमेशा हर बात और कार्य के लिए
एक्साइटेड रहते हैं। यह उत्साह ही जीवन में तेज गति से
आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। आपका दिमाग तेज है
और इसी के बल पर आप वहां भी घुस सकते हैं, जहां लोग
जाने से डरते हैं। आपकी निगाहें दसों दिशाओं
को देखती रहती हैं, मतलब कि आपसे कोई बच
नहीं सकता।
9.स्वान (swan) : यदि आपका जन्म 2 सितंबर से 29
सितंबर के बीच हुआ है तो आप स्वान की तरह हैं।
'स्वान' का अर्थ हंस। हंस शांत और सुलझे नजर आते हैं
लेकिन भीतर से किसी न किसी बात में उलझे रहते हैं।
आपके व्यक्तित्व को समझ पाना कठिन है। अगर
आपको कोई उकसा दे तो आप हिंसक भी हो सकते हैं।
10.वुडपैकर (woodpecker) : यदि आपका जन्म 30
सितंबर से 27 अक्टूबर के बीच हुआ है तो आप हैं वुडपैकर।
वुडपैकर को हिन्दी में कठफोड़वा और हुदहुद कहते हैं।
सचमुच हार्ड वर्क करना तो आप जानते ही हैं।
मुश्किलों से जूझने की शक्ति आप में ही हो सकती है।
आपको कोलाहल से भरी जिंदगी पसंद है, लेकिन आप
अपने लिए एकांत भी चाहते हैं। आपके इरादे पक्के होते हैं
और प्लान एकदम सही। आपके होने का मतलब है
शांति और खुशी।
11.केस्ट्रेल (kestrel) : यदि आपका जन्म 28 अक्टूबर से
24 नवंबर के बीच हुआ है, तो आप हैं केस्ट्रेल। केस्ट्रेल एक
प्रकार का छोटा बाज होता है। इसे आप हिन्दी में
खेरमुतिया कह सकते हैं। आपका लक्ष्य निर्धारित
होता है। अपने आत्मविश्वास के बल पर आप उन
ऊंचाइयों को छू सकते हैं जिनके बारे में दूसरे सोच
भी नहीं सकते। हालांकि यह कितना सही है
कि आपका तेज दिमाग आपको एक मुद्दे से दूसरे मुद्दे पर
शिफ्ट कर देता है? यह जानना जरूरी है।
12.रैवेन (raven) : यदि आपका जन्म 25 नवंबर से 23
दिसंबर के बीच हुआ है तो आप हैं रैवेन। इसे हिन्दी में
काला कौआ या डोम कौआ कहते हैं। आप चैलेंज
स्वीकार करने में माहिर हैं और आप जीत भी जाते हैं।
यही बात है जिसके चलते लोग आपसे प्रभावित रहते हैं।
आप उतने ही इंटेलिजेंट हैं जितने कि आपके आसपास के
लोग, लेकिन उनमें और आप में यही फर्क है कि आप में
शक्ति और साहस का भंडार है तभी तो वे आपके नेतृत्व
में काम कर रहे हैं। यदि आपने शक्ति और साहस
खो दिया है तो आप सबसे पीछे खड़े रहेंगे।
13.हेरॉन (Heron) : यदि आपका जन्म 24 दिसंबर से 20
जनवरी के बीच हुआ है तो आप हैं हेरॉन। हेरॉन
को हिन्दी में वगुला या बगुला कहते हैं। आप
एकांतप्रिय हैं। आपको लोग भ्रामक और चालाक
समझते हैं। हालांकि आपको इससे फर्क नहीं पड़ता।
कभी-कभी आप असुरक्षा की भावना से ग्रस्त
हो जाते हैं लेकिन आप में साहस की कमी नहीं है
इसलिए आप खुद को संभालकर जीवन ऊर्जा से भर जाते
हैं। आपको अपनी तारीफ पसंद है।

आजीविका प्राप्ति के लिये

आजीविका प्राप्ति के लिये
माता काली का अति शक्ति शाली मंत्र इस के
प्रभाव से
सरकारी नोकरी लगती है।
या जॉब प्रमाणेन्ट हो जायेगी मतलब की इस
मंत्र का जाप करने से आपको आजीविका का लाभ होगा .
मंत्र
ओउम
नमो काली कंकाली महाकाली मुख
सुन्दर जिह्वा वाली ,
चार वीर भैरों चौरासी , चार
बत्ती पूजूं पान ए मिठाई
अब बोलो काली क़ी दुहाई .
इस मंत्र का हर रोज 30मिनट तक जाप करने से आर्थिक लाभ
मिलता है आजमाया हुआ मंत्र है
जीवन मे धन से सम्बन्धित कोई
भी परेशानी नहीं रहती।
माता काली की कृपा से सब काम संभव
हो जाते है 15 दिन मे एक बार
किसी भी मंगलवार के दिन
काली माता को मीठापान व मिठाई का भोग लगते
रहें और चमत्कार देखें..

नवग्रह शांतिदायक टोटके-

नवग्रह शांतिदायक टोटके-------
सूर्यः-
१॰ सूर्यदेव के दोष के लिए खीर का भोजन बनाओ और
रोजाना चींटी के बिलों पर रखकर आवो और
केले को छील कर रखो ।
२॰ जब वापस आवो तभी गाय को खीर और
केला खिलाओ ।
३॰ जल और गाय का दूध मिलाकर सूर्यदेव को चढ़ावो। जब जल चढ़ाओ,
तो इस तरह से कि सूर्य की किरणें उस गिरते हुए जल
में से निकल कर आपके मस्तिष्क पर प्रवाहित हो ।
४॰ जल से अर्घ्य देने के बाद जहाँ पर जल चढ़ाया है, वहाँ पर
सवा मुट्ठी साबुत चावल चढ़ा देवें ।
चन्द्रमाः-
१॰ पूर्णिमा के दिन गोला, बूरा तथा घी मिलाकर गाय को खिलायें
। ५ पूर्णमासी तक गाय को खिलाना है ।
२॰ ५ पूर्णमासी तक केवल शुक्ल पक्ष में प्रत्येक १५
दिन गंगाजल तथा गाय का दूध चन्द्रमा उदय होने के बाद
चन्द्रमा को अर्घ्य दें । अर्घ्य देते समय ऊपर दी गई
विधि का इस्तेमाल करें ।
३॰ जब चाँदनी रात हो, तब जल के किनारे जल में
चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब को हाथ जोड़कर दस मिनट तक खड़ा रहे और
फिर पानी में मीठा प्रसाद चढ़ा देवें,
घी का दीपक प्रज्जवलित करें । उक्त
प्रयोग घर में भी कर सकते हैं, पीतल के
बर्तन में पानी भरकर छत पर रखकर
या जहाँ भी चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब पानी में
दिख सके वहीं पर यह कार्य कर सकते हैं ।
मंगलः-
१॰ चावलों को उबालने के बाद बचे हुए माँड-पानी में
उतना ही पानी तथा १०० ग्राम गुड़ मिलाकर
गाय को खिलाओ ।
२॰ सवा महीने में जितने दिन होते हैं, उतने साबुत
चावल पीले कपड़े में बाँध कर यह
पोटली अपने साथ रखो । यह प्रयोग
सवा महीने तक करना है ।
३॰ मंगलवार के दिन हनुमान् जी के व्रत रखे । कम-से-
कम पाँच मंगलवार तक ।
४॰ किसी जंगल जहाँ बन्दर रहते हो, में
सवा मीटर लाल कपड़ा बाँध कर आये, फिर
रोजाना अथवा मंगलवार के दिन उस जंगल में बन्दरों को चने और गुड़
खिलाये ।
बुधः-
१॰ सवा मीटर सफेद कपड़े में हल्दी से २१
स्थान पर “ॐ” लिखें तथा उसे पीपल पर
लटका दें ।
२॰ बुधवार के दिन थोड़े गेहूँ तथा चने दूध में डालकर
पीपल पर चढ़ावें ।
३॰ सोमवार से बुधवार तक हर सप्ताह कनैर के पेड़ पर दूध चढ़ावें
। जिस दिन से शुरुआत करें उस दिन कनैर के पौधे
की जड़ों में कलावा बाँधें । यह प्रयोग कम-से-कम पाँच
सप्ताह करें ।
बृहस्पतिः-
१॰ साँड को रोजाना सवा किलो ७ अनाज, सवा सौ ग्राम गुड़
सवा महीने तक खिलायें ।
२॰ हल्दी पाँच गाँठ पीले कपड़े में बाँधकर
पीपल के पेड़ पर बाँध दें तथा ३ गाँठ पीले
कपड़े में बाँधकर अपने साथ रखें ।
३॰ बृहस्पतिवार के दिन भुने हुए चने बिना नमक के ग्यारह
मन्दिरों के सामने बांटे । सुबह उठने के बाद घर से निकलते
ही जो भी जीव सामने आये उसे
ही खिलावें चाहे कोई जानवे हो या मनुष्य ।
शुक्रः-
१॰ उड़द का पौधा घर में लगाकर उस पर सुबह के समय दूध चढ़ावें ।
प्रथम दिन संकल्प कर पौधे की जड़ में कलावा बाँधें ।
यह प्रयोग सवा दो महीने तक करना है ।
२॰ सवा दो महीने में जितने दिन होते है, उतने उड़द के
दाने सफेद कपड़े में बाँधकर अपने पास रखें ।
३॰ शुक्रवार के दिन पाँच गेंदा के फूल तथा सवा सौ उड़द
पीपल की खोखर में रखें, कम-से-कम पाँच
शुक्रवार तक ।
शनिः-
१॰ सवा महिने तक प्रतिदिन तेली के घर बैल को गुड़
तथा तेल लगी रोटी खिलावें ।
राहूः-
१॰ चन्दन की लकड़ी साथ में रखें ।
रोजाना सुबह उस चन्दन
की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर
पानी में मिलाकर उस पानी को पियें ।
२॰ साबुत मूंग का खाने में अधिक सेवन करें ।
३॰ साबुत गेहूं उबालकर मीठा डालकर
कोड़ी मनुष्यों को खिलावें तथा सत्कार करके घर वापस आवें

केतुः-
१॰ मिट्टी के घड़े का बराबर आधा-आधा करो । ध्यान रहे
नीचे का हिस्सा काम में लेना है, वह समतल
हो अर्थात् किनारे उपर-नीचे न हो । इसमें अब एक
छोटा सा छेद करें तथा इस हिस्से को ऐसे स्थान पर जहाँ मनुष्य-पशु
आदि का आवागमन न हो अर्थात् एकान्त में, जमीन में
गड्ढा कर के गाड़ दें । ऊपर का हिस्सा खुला रखें । अब
रोजाना सुबह अपने ऊपर से उबार कर सवा सौ ग्राम दूध उस घड़े के
हिस्से में चढ़ावें । दूध चढ़ाने के बाद उससे अलग हो जावें तथा जाते
समय पीछे मुड़कर नहीं देखें 

# कर्ज या ऋण

# कर्ज या ऋण एक ऐसी चीज है, जिससे
शायद ही कोई बच पाते हैं। कभी न
कभी, किसी न किसी रूप में हमें
कर्ज के बोझ से दबना ही पड़ता है।
किसी को अपनी छोटी-
मोटी जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज चाहिए
तो किसी को मकान, बिज़नस और
फैक्ट्री जैसी बड़ी शुरुआत के
लिए कर्ज लेना पड़ता है। आधुनिक भाषा में इसे आप लोन कह सकते
हैं। यह लोन या कर्ज ऐसा होता है कि अच्छे-अच्छों के
पसीने छूट जाते हैं। ऐसे में हर कोई
यही चाहता है कि इन कर्जों से मुक्ति मिले और चैन
की जिंदगी जिए। आइए, जानें कुछ ऐसे
ही टोटकों के बारे में जो जल्द से जल्द कर्ज से
मुक्ति दिलाने में कारगर हैं...
हरे रंग के गणपति की मूर्ति मेन गेट पर आगे-
पीछे लगाएं। इसे वास्तुदोष नाशक माना गया है।
हनुमान मंदिर जाकर मंगलवार और शनिवार के रोज उनपर तेल और
सिंदूर चढ़ाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें।
फायदा होगा।
पांच ऐसे लाल गुलाब लें, जो पूरी तरह से खिले हुए हों।
अब डेढ़ मीटर सफेद कपड़ा लेकर उसमें इन
पांचों गुलाबों को गायत्री मंत्र पढ़ते हुए बांध दें। इसे जाकर
बहते जल में प्रवाहित कर दें।
बुधवार के दिन मूंग (सवा पाव) उबालकर उसमें घी और
शक्कर मिलाकर गाय को खिलाएं। इससे जल्द ही कर्ज
से मुक्ति मिलती है।
कहते हैं लाल मसूर की दाल का दान
करना भी कर्ज से मुक्ति दिलाता है।
मिट्टी के दीये में सरसों का तेल भरकर इस
दिये पर ढक्कन लगा दें। इसे किसी शनिवार
को नदी या तालाब के किनारे मिट्टी के
नीचे गाड़ देने से फायदा होता है।
कर्ज से मुक्ति के लिए इन मंत्रों में से किसी एक का जाप
प्रतिदिन करें तो अवश्य फायदा होगा।
ॐ गणेश। ऋण छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्
ॐ मंगलमूर्तये नमः
ॐ गं ऋणहर्तायै नमः
श्मशान में मौजूद कुएं से जल भरकर पीपल के वृक्ष पर
चढ़ाना चाहिए। यह नियम लगातार 7 शनिवार को करें तो फायदा होगा।
कहा जाता है कि भोजन में गुड़ का प्रयोग भी इस
दृष्टि से अति उत्तम है।
कर्ज से जल्द छुटकारा के लिए ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें
और कर्ज की पहली किश्त को मंगलवार के
दिन से ही देना शुरू करें। कहते हैं इससे जल्द
ही कर्ज उतर जाता है।

Thursday, November 20, 2014

मनी प्लांट के पौधे

वास्तु शास्त्रीयों का मानना है कि
मनी प्लांट के पौधे
के घर में लगाने के लिए आग्नेय दिशा सबसे उचित दिशा है। इस दिशा में
यह पौधा लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का भी लाभ
मिलता है।
मनी प्लांट को आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाने
का कारण ये है इस दिशा के देवता गणेशजी है
जबकि प्रतिनिधि शुक्र हैं। गणेश जी अमंगल का नाश
करने वाले हैं जबकि शुक्र सुख-समृद्धि लाने वाले।
यही नहीं बल्कि बेल और लता का कारण
शुक्र को माना गया है। इसलिए मनी प्लांट को आग्नेय
दिशा में लगाना उचित माना गया है।
कभी करें यह गलती
मनी प्लांट को कभी भी ईशान
यानि उत्तर पूर्व दिशा में नहीं लगाना चाहिए, यह
दिशा इसके लिए सबसे नकारात्मक मानी गई है।
क्योंकि ईशान दिशा का प्रतिनिधि देवगुरू बृहस्पति को माना गया है। और
शुक्र तथा बृहस्पति में शत्रुवत संबंध होता है। इसलिए शुक्र से
संबंधित यह पौधा ईशान दिशा में होने पर नुकसान होता है।
हालांकि इस दिशा में तुलसी का लगाया जा सकता है।
मनी प्लांट को घर के अंदर गमले में अथवा बोतल में
पानी भरकर भी लगाया जा सकता है। इससे
सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले सकारात्मक उर्जा को आकर्षित
किया जा सकता है।

टोटका वह विज्ञान है

टोटका वह विज्ञान है जिसके संतुलित, समयबद्ध और निरन्तर
प्रयोग करते रहने से समस्याओं का निराकरण संभव हो सकता है।
जो बातें हमारा कार्य सिद्ध करवा देतीं है तथा
हमारी समझ से बाहर हैं, उन्हें हम अलौकिक,
गुहय आदि कह देते हैं। अलौकिक अर्थात् जो हमारे लोक
की न हो। ऐसे ही अलौकिक पदार्थ,
प्रयोग, कर्म जो अल्प समय में और न्यनतम प्रयास द्वारा संपन्न
किए जाते हैं, टोटका कहलाते हैं। इनके फलीभूत होने
के पीछे दो बातें ध्यान में रखना अति आवश्यक
होती हैं। एक तो इनको करते समय कोई टोके
नहीं, दूसरे इनके प्रति पूर्ण रुप से श्रद्धा और
आस्था कर्ता के मन में होनी चाहिए।
आपने प्रायः सुना होगा कि कमर की नस यदि चढ़ जाए,
इसे सामान्य भाषा में ‘चिक चढ़ना’ कहते हैं, तो किसी
ऐसे बच्चे के पैर सात बार पीठ पर लगवाने देने से वह
ठीक हो जाती है जो उल्टे पैर जन्मा हो।
बच्चों को नजर लग जाती है, यह अकाट्य सत्य है।
नजर लगने पर प्रभावित बच्चे के ऊपर से नमक, मिर्च उतार कर
जलाई जाती है। लहसुन की
कली, जायफल, नील कंठ का पर आदि का
नजरबट्टू डालना अथवा उसके माथे पर काजल का टीका
लगा कर नज़र के कुप्रभाव से रक्षा करना सर्वविदित है। काले धागे
को पहनाना तो अधिकांशतः प्रचलित है।
छोटे बच्चे को दॉत निकलने कभी-कभी
असहाय पीड़ा जनित परिस्थिति उत्पन्न हो
जाती है। इसके लिए एक टोटका :- बच्चे के गले में
रोहू मछली के पांच दांत धागे में बांध कर लटकवा
दीजिए, चमत्कारी रुप से आपको लाभ दिखाई
देगा।
कभी-कभी नवजात शिशु नींद
में डर कर चौंक जाते हैं। जैसे किसी भयानक दृश्य से
सहम गये हो। ऐसे बच्चों के गले में लहसुन की चार
पांच कलियां धागे में बांध कर डाल दीजिए। सूखने पर यह
नए से बदल दिया कीजिए। बच्चा नींद में
डरेगा नहीं।
जन्म लेने वाली प्रथम संतान यदि लड़का है तो
उसकी ‘नाल’ उसके छट के कपड़ में बांध कर अपने
पास सुरक्षित रख लें। किसी भी शुभ कार्य
में अथवा अपने इष्ट कार्य की सिद्धी के
लिए घर से निकलते समय उसको भी अपने साथ श्रद्धा
भाव से ले जाया करें। आपका वांछित कार्य अवश्य ही
पूर्ण होगा।
‘बुरी नजर वाले तेरा मुह काला’, ‘बुरी नजर
वाले तेरे बच्चे शराब पिए’, ‘बुरी नजर’, उल्टा हो तुझ
पर असर’, आदि शब्द आपने ट्रकों के पीछे लिखे
अवश्य देखें होगें। दुकानों पर नींबू-मिर्च, भवनों पर
राक्षस के डरावने मुखोट हंडिया, हल्दी
की गांठ, आम के पत्तों की बंदनबार आदि
भी अवश्य देखी होगी। टोटकों
में अविश्वास करने वाला व्यक्ति भी इन्हें
किसी न किसी रुप में प्रयोग करता अवश्य
दिखाई दे जाता है।
नजर के असर को बेअसर करने के लिए लोग अपने-अपने
तरीके से अथवा सुविधा अनुसार कुछ न कुछ उपक्रम
करते रहते हैं। एक बार यह प्रयोग भी करके देखिए
आपको आशातीत लाभ दिखाई देगा।

रसोईघर के लिए कुछ वास्तु टिप्स :

रसोईघर के लिए कुछ वास्तु टिप्स :
घर में अच्छे स्वास्थ्य और उर्जा के लिए वास्तु उन्मुख एक रसोई घर
का एक बहुत महत्वपूर्ण महत्व है. रसोईघर के डिजाइन और
वहा उपयोग में आने वाले सामान को जमाने के लिए कुछ वास्तु
दिशा निर्देश / टिप्स :
रसोईघर का स्थान :
रसोई घर के लिए सबसे उपयुक्त स्थान आग्नेय कोण यानि दक्षिण
पूर्वी दिशा है जो कि अग्नि का स्थान होता हैं, दक्षिण
पूर्व दिशा के बाद, दूसरी वरिएता का उपयुक्त स्थान उत्तर
पश्चिम दिशा है |
रसोईघर में सामान रखने के उपयुक्त स्थान :
कुकिंग स्टोव, गैस का चूल्हा या कुकिंग रेंज रसोई घर के दक्षिण
पूर्वी कोने में होना चाहिए| यह स्टोव इस तरह से
रखा जाना चाहिए जिससे की खाना बनाने वाला व्यक्ति,
खाना बनाते वक्त पूर्व का सामना करे.
पानी के भंडारण, आर ओ, पानी फिल्टर और
इसी तरह के अन्य सामानों के लिए
जहा पानी संग्रहीत किया जाता है,
उपयुक्त जगह उत्तर पूर्व दिशा हें.
पानी के सिंक के लिए जगह उत्तर पूर्व में
होनी चाहिए.
बिजली के सामान के लिए, दक्षिण पूर्व या दक्षिण
दिशा है.
फ्रिज पश्चिम, दक्षिण, दक्षिण पूर्व या दक्षिण पश्चिम दिशा में
रखा जा सकता है.
खाना पकाने में इस्तेमाल किये जाने वाली वस्तुए, अनाज,
मसाले, दाल, तेल, आटा और अन्य खाद्य सामग्रियों, बर्तन,
क्रॉकरी इत्यादि के भंडारण के लिए स्थान पश्चिम
या दक्षिण दिशा में बनाना चाहिए.
वास्तु अनुसार रसोई घर की कोई दिवार शौचालय या बाथरूम
के साथ लगी नहीं होनी चाहिए
और रसोईघर, शौचालय और बाथरूम के नीचे या ऊपर
भी नहीं होना चाहिए.
रसोई का दरवाजा उत्तर, पूर्व या पश्चिम दिशा में खुलना चाहिए.
खिड़किया और हवा वाहर फेखने वाला पंखा पूर्व में होना चाहिए,
यह उत्तरी दीवार में
भी लगाया जा सकता है.
रसोई घर में पूजा का स्थान यथा संभव नहीं होना चाहिए.
खाने की मेज को रसोई घर में
नहीं रखा जाना चाहिए और
रखनी पड़ती हें तो यह उत्तर पश्चिम
दिशा में रखा जाना चाहिए और भोजन करते समय चेहरा पूर्व या उत्तर
की देखते होना अच्छा है.