हस्तरेखा से जानिए अपना भाग्य (Know your fortune
through Palmistry)
शास्त्री मोहनमुरारी जी कहते
हे
गर्भावस्था के दौरान ही शिशु के हाथ में
लकीरो का जाल बुन जाता है, जो कि जन्म से लेकर
मृत्यु तक रेखाओ के रुप में विद्यमान रहता है। इसे हस्त
रेखा (Palm line) के रुप में जाना जाता है। सामान्यतया 16 वर्ष
तक की आयु के
बच्चो की हाथों की रेखाओ में परिवर्तन
होता रहता है।
सोलह वर्ष की आयु होने पर मुख्य रेखाएँ
(जीवन रेखा, भाग्य रेखा इत्यादि) (Life line,
Fortune line) स्थिर हो जाती है तथा कर्मो के
अनुसार अन्य छोटे-बडे परिवर्तन होते रहते हैं। तथा ये
परिवर्तन जीवन के अंतिम क्षण तक होते रहते
हैं (Life line keep on changing throughout life)।
चूंकि हस्त रेखा (Samudrik Shastra)
विज्ञान कर्मो के आधार पर टिका है, इसलिए मनुष्य जैसे कर्म
करता है वैसा ही परिवर्तन उसके हाथ
की रेखाओ में हो जाता है (Palmistry stand
by our work, palm line change with them)। हाथ
का विश्लेषण करते समय सबसे पहले हम हाथ
की बनावट को देखते हैं तत्पश्चात यह
देखा जाता है कि हाथ मुलायम है या सख्त।आम तौर पर
पुरुषो का दायाँ हाथ तथा स्त्रियों का बायाँ हाथ देखा जाता है।यदि कोइ
पुरुष बायें हाथ से काम करता है तो उसका बायाँ हाथ
देखा जाता है। हाथ में जितनी कम रेखाऎं
होती हैं, भाग्य की दृष्टि से हाथ
उतना ही सुन्दर माना जाता है (Lots of Palm
line are not good for Fortune)।
हाथ में मुख्यतः चार रेखाओ का उभार स्पष्ट रुप से रहता है
( We can see four main line in palm)
जीवन रेखा (Life Line)
जीवन रेखा हृदय रेखा के ऊपरी भाग से
शुरु होकर आमतौर पर मणिबन्ध पर जाकर समाप्त
हो जाती है (Life line start from heart
line and end on Manibandh line)। यह रेखा भाग्य
रेखा के समानान्तर चलती है, परन्तु कुछ
व्यक्तियो की हथेली में
जीवन रेखा हृदय रेखा में से निकलकर भाग्य रेखा में
किसी भी बिन्दु पर मिल
जाती है।जीवन
रेखा तभी उत्तम
मानी जाती है यदि उसे कोइ अन्य रेखा न
काट रही हो तथा वह
लम्बी हो इसका अर्थ है
कि व्यक्ति की आयु
लम्बी होगी तथा अधिकतर
जीवन सुखमय बीतेगा।
रेखा छोटी तथा कटी होने पर आयु कम
एंव जीवन संघर्षमय होगा(If there is
breakage in life line or there is any cut it means
your life is short and in struggle)।
भाग्य रेखा:(Fate Line)
हृदय रेखा के मध्य से शुरु होकर मणिबन्ध तक जाने
वाली सीधी रेखा को भाग्य
रेखा कहते हैं (Straight Line start from middle of
heart and end on Manibandh line called fate
line) ।स्पष्ट रुप से दिखाई देने वाली रेखा उत्तम
भाग्य का घौतक है।यदि भाग्य रेखा को कोइ अन्य रेखा न
काटती हो तो भाग्य में किसी प्रकार
की रुकावट नही आती।
परन्तु यदि जिस बिन्दु पर रेखा भाग्य को काटती है
तो उसी वर्ष व्यक्ति को भाग्य
की हानि होती है।कुछ लोगो के हाथ में
जीवन रेखा एंव भाग्य रेखा में से एक
ही रेखा होती है।इस स्थिति में वह
व्यक्ति आसाधारण होता है, या तो एकदम
भाग्यहीन या फिर उच्चस्तर
का भाग्यशाली होता है (If there is no fortune
line on your palm it means you are not a middle
class)। ऎसा व्यक्ति मध्यम स्तर का जीवन
कभी नहीं जीता है।
हृदय रेखा: (Heart Line)
हथेली के मध्य में एक भाग से लेकर दूसरे भाग तक
लेटी हुई रेखा को हृदय रेखा कहते हैं (Vertical
line starts from middle of palm and end on
heart line called heart line)। यदि हृदय रेखा एकदम
सीधी या थोडा सा घुमाव लेकर
जाती है तो वह व्यक्ति को निष्कपट
बनाती है। यदि हृदय
रेखा लहराती हुई चलती है तो वह
व्यक्ति हृदय से पीडित रहता है।
यदि रेखा टूटी हुई हो या उस पर कोइ निशान
हो तो व्यक्ति को हृदयाघात हो सकता है(There is Chance
of heart attack if heart line is break)।
मस्तिष्क रेखा:(Brain Line)
हथेली के एक छोर से दूसरे छोर तक उंगलियो के
पर्वतो तथा हृदय रेखा के समानान्तर जाने
वाली रेखा को मस्तिष्क रेखा कहते हैं (Parallel
line to heart line is called mind line)। यह
आवश्यक नहीं कि मस्तिष्क रेखा एक छोर से दूसरे
छोर तक (हथेली) जायें, यह बीच में
ही किसी भी पर्वत
(Planetary Mounts) की ओर मुड
सकती है। यदि हृदय रेखा और मस्तिष्क
रेखा आपस में न मिलें तो उत्तम रहता है (Brain line is
good if mind line or heart line are not together)।
स्पष्ट एंव बाधा रहित रेखा उत्तम
मानी जाती है। कई बार मस्तिष्क
रेखा एक छोर पर दो भागों में विभाजित हो जाती है।
ऎसी रेखा वाला व्यक्ति स्थिर स्वभाव
का नहीं होता है, सदा भ्रमित रहता है।
लाल किताब में सामुद्रिक ज्ञान
यानी पामिस्ट्रि (Palmistry) के आधार पर
व्यक्ति की जन्मकुण्डली का निर्माण
होता है, तथा जिन
व्यक्तियो को अपनी जन्मतिथि तथा जन्म समय मालूम
नही उनके लिए लाल किताब बहुत
लाभकारी है।
through Palmistry)
शास्त्री मोहनमुरारी जी कहते
हे
गर्भावस्था के दौरान ही शिशु के हाथ में
लकीरो का जाल बुन जाता है, जो कि जन्म से लेकर
मृत्यु तक रेखाओ के रुप में विद्यमान रहता है। इसे हस्त
रेखा (Palm line) के रुप में जाना जाता है। सामान्यतया 16 वर्ष
तक की आयु के
बच्चो की हाथों की रेखाओ में परिवर्तन
होता रहता है।
सोलह वर्ष की आयु होने पर मुख्य रेखाएँ
(जीवन रेखा, भाग्य रेखा इत्यादि) (Life line,
Fortune line) स्थिर हो जाती है तथा कर्मो के
अनुसार अन्य छोटे-बडे परिवर्तन होते रहते हैं। तथा ये
परिवर्तन जीवन के अंतिम क्षण तक होते रहते
हैं (Life line keep on changing throughout life)।
चूंकि हस्त रेखा (Samudrik Shastra)
विज्ञान कर्मो के आधार पर टिका है, इसलिए मनुष्य जैसे कर्म
करता है वैसा ही परिवर्तन उसके हाथ
की रेखाओ में हो जाता है (Palmistry stand
by our work, palm line change with them)। हाथ
का विश्लेषण करते समय सबसे पहले हम हाथ
की बनावट को देखते हैं तत्पश्चात यह
देखा जाता है कि हाथ मुलायम है या सख्त।आम तौर पर
पुरुषो का दायाँ हाथ तथा स्त्रियों का बायाँ हाथ देखा जाता है।यदि कोइ
पुरुष बायें हाथ से काम करता है तो उसका बायाँ हाथ
देखा जाता है। हाथ में जितनी कम रेखाऎं
होती हैं, भाग्य की दृष्टि से हाथ
उतना ही सुन्दर माना जाता है (Lots of Palm
line are not good for Fortune)।
हाथ में मुख्यतः चार रेखाओ का उभार स्पष्ट रुप से रहता है
( We can see four main line in palm)
जीवन रेखा (Life Line)
जीवन रेखा हृदय रेखा के ऊपरी भाग से
शुरु होकर आमतौर पर मणिबन्ध पर जाकर समाप्त
हो जाती है (Life line start from heart
line and end on Manibandh line)। यह रेखा भाग्य
रेखा के समानान्तर चलती है, परन्तु कुछ
व्यक्तियो की हथेली में
जीवन रेखा हृदय रेखा में से निकलकर भाग्य रेखा में
किसी भी बिन्दु पर मिल
जाती है।जीवन
रेखा तभी उत्तम
मानी जाती है यदि उसे कोइ अन्य रेखा न
काट रही हो तथा वह
लम्बी हो इसका अर्थ है
कि व्यक्ति की आयु
लम्बी होगी तथा अधिकतर
जीवन सुखमय बीतेगा।
रेखा छोटी तथा कटी होने पर आयु कम
एंव जीवन संघर्षमय होगा(If there is
breakage in life line or there is any cut it means
your life is short and in struggle)।
भाग्य रेखा:(Fate Line)
हृदय रेखा के मध्य से शुरु होकर मणिबन्ध तक जाने
वाली सीधी रेखा को भाग्य
रेखा कहते हैं (Straight Line start from middle of
heart and end on Manibandh line called fate
line) ।स्पष्ट रुप से दिखाई देने वाली रेखा उत्तम
भाग्य का घौतक है।यदि भाग्य रेखा को कोइ अन्य रेखा न
काटती हो तो भाग्य में किसी प्रकार
की रुकावट नही आती।
परन्तु यदि जिस बिन्दु पर रेखा भाग्य को काटती है
तो उसी वर्ष व्यक्ति को भाग्य
की हानि होती है।कुछ लोगो के हाथ में
जीवन रेखा एंव भाग्य रेखा में से एक
ही रेखा होती है।इस स्थिति में वह
व्यक्ति आसाधारण होता है, या तो एकदम
भाग्यहीन या फिर उच्चस्तर
का भाग्यशाली होता है (If there is no fortune
line on your palm it means you are not a middle
class)। ऎसा व्यक्ति मध्यम स्तर का जीवन
कभी नहीं जीता है।
हृदय रेखा: (Heart Line)
हथेली के मध्य में एक भाग से लेकर दूसरे भाग तक
लेटी हुई रेखा को हृदय रेखा कहते हैं (Vertical
line starts from middle of palm and end on
heart line called heart line)। यदि हृदय रेखा एकदम
सीधी या थोडा सा घुमाव लेकर
जाती है तो वह व्यक्ति को निष्कपट
बनाती है। यदि हृदय
रेखा लहराती हुई चलती है तो वह
व्यक्ति हृदय से पीडित रहता है।
यदि रेखा टूटी हुई हो या उस पर कोइ निशान
हो तो व्यक्ति को हृदयाघात हो सकता है(There is Chance
of heart attack if heart line is break)।
मस्तिष्क रेखा:(Brain Line)
हथेली के एक छोर से दूसरे छोर तक उंगलियो के
पर्वतो तथा हृदय रेखा के समानान्तर जाने
वाली रेखा को मस्तिष्क रेखा कहते हैं (Parallel
line to heart line is called mind line)। यह
आवश्यक नहीं कि मस्तिष्क रेखा एक छोर से दूसरे
छोर तक (हथेली) जायें, यह बीच में
ही किसी भी पर्वत
(Planetary Mounts) की ओर मुड
सकती है। यदि हृदय रेखा और मस्तिष्क
रेखा आपस में न मिलें तो उत्तम रहता है (Brain line is
good if mind line or heart line are not together)।
स्पष्ट एंव बाधा रहित रेखा उत्तम
मानी जाती है। कई बार मस्तिष्क
रेखा एक छोर पर दो भागों में विभाजित हो जाती है।
ऎसी रेखा वाला व्यक्ति स्थिर स्वभाव
का नहीं होता है, सदा भ्रमित रहता है।
लाल किताब में सामुद्रिक ज्ञान
यानी पामिस्ट्रि (Palmistry) के आधार पर
व्यक्ति की जन्मकुण्डली का निर्माण
होता है, तथा जिन
व्यक्तियो को अपनी जन्मतिथि तथा जन्म समय मालूम
नही उनके लिए लाल किताब बहुत
लाभकारी है।
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