इस भोग से होगा आपका प्रमोशन पक्का, चमकने लगेगा व्यापार
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भगवान श्री दत्तात्रेय जी ब्रह्मा,
विष्णु और महेश जी का सम्मिलित स्वरूप हैं।
इनके तीन सिर तथा छह भुजाएं हैं। भगवान
दत्तात्रेय जी अपनी बहुज्ञता के लिए
विख्यात हैं। दत्तात्रेय जी में साक्षात भगवान और
सद्गुरु दोनों रूप समाहित हैं तभी तो इन्हें
'श्री गुरुदेवदत्त' भी कहा जाता है।
गुजरात में ब्रह्मा, विष्णु और महेश जी के अवतार
दत्तात्रेय जी का प्रसिद्ध मन्दिर है। यहां भगवान
त्रिदेव रूप में भक्तों को आशीर्वाद देते हैं एवं
उनकी मनचाही मुरादें
पूरी करते हैं। इस मंदिर में 52 बृहस्पतिवार तक
किया गया तप बेरोजगारी से निजात दिलाता है।
यदि आप भी किसी खास
इच्छा को पूरी करने के लिए मेहनत कर रहे हैं
और सफलता प्राप्त
नहीं हो पा रही है
तो ऐसा माना जाता है कि अगर इस मंदिर में भगवान दत्तात्रेय
जी को गुड़ और मूंगफली का भोग
लगाया जाए तो व्यापार में तरक्की होने
लगती है, नौकरी में आ
रही परेशानियों से मुक्ति के साथ साथ प्रसन्नता एवं
प्रमोशन की राह पर जाया जा सकता है और
बेहतर भविष्य की ओर बढ़ा जा सकता है।
श्री कृष्ण
जी की गीता के अनुसार कुछ
भी फल प्राप्त करने के लिए कर्म करना सबसे
ज्यादा जरूरी है। ऐसा करने पर बहुत
ही जल्द आपकी मनोकामनाएं अवश्य
ही पूरी हो जाएंगी।
इस मंदिर की विशेषता है कि यहां प्रणाम करने
वालों को एक साथ त्रिदेव का आशीर्वाद प्राप्त
होता है। भगवान दत्तात्रेय जी भोले नाथ के समान
भोले हैं, विष्णु जी जैसे
भविष्यदर्शी एवं तीव्रबुद्धि और जगत
पिता ब्रह्मा जैसे मनीषी पंडित हैं।
इसी कारण वश उन्हें हर्षित करना अत्यधिक
सरल है। उनके समक्ष भक्त
जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण
हो जाती है।
रोजगार के अतिरिक्त चर्म रोगों से निजात पाने के लिए
भी यह मंदिर किसी वरदान से कम
नहीं है। भगवान दत्तात्रेय
जी की आरती के उपरांत
पंडित जी वहां उपस्थित श्रद्धालुओं पर पवित्र जल
का छिड़काव करते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र जल से
त्वचा संबंधित रोगों से हमेशा के लिए निजात मिल जाता है।
इस मंदिर को नर्मदा किनारे स्वामी वासुदेवानंद महाराज
नाम के साधु ने स्थापित किया था। वह प्रतिदिन भगवान दत्तात्रेय
जी को गुड़ और मूंगफली का भोग लगाते
थे। धीरे धीरे
यहां भक्तों की संख्या में वृद्धि होने
लगी। भगवान दत्तात्रेय जी के मंदिर
की अद्भुत और अलौकीक शक्ति बहुत
ज्यादा है। आप जो भी मन्नतें या मुरादें भगवान
दत्तात्रेय जी के दरबार में लेकर जाते हैं उन
सभी को वह अवश्य पूरा करते हैं। साल भर
यहां भक्त गण दर्शनों के लिए आते हैं और इस स्थान से
कभी कोई खाली हाथ
नहीं जाता।
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भगवान श्री दत्तात्रेय जी ब्रह्मा,
विष्णु और महेश जी का सम्मिलित स्वरूप हैं।
इनके तीन सिर तथा छह भुजाएं हैं। भगवान
दत्तात्रेय जी अपनी बहुज्ञता के लिए
विख्यात हैं। दत्तात्रेय जी में साक्षात भगवान और
सद्गुरु दोनों रूप समाहित हैं तभी तो इन्हें
'श्री गुरुदेवदत्त' भी कहा जाता है।
गुजरात में ब्रह्मा, विष्णु और महेश जी के अवतार
दत्तात्रेय जी का प्रसिद्ध मन्दिर है। यहां भगवान
त्रिदेव रूप में भक्तों को आशीर्वाद देते हैं एवं
उनकी मनचाही मुरादें
पूरी करते हैं। इस मंदिर में 52 बृहस्पतिवार तक
किया गया तप बेरोजगारी से निजात दिलाता है।
यदि आप भी किसी खास
इच्छा को पूरी करने के लिए मेहनत कर रहे हैं
और सफलता प्राप्त
नहीं हो पा रही है
तो ऐसा माना जाता है कि अगर इस मंदिर में भगवान दत्तात्रेय
जी को गुड़ और मूंगफली का भोग
लगाया जाए तो व्यापार में तरक्की होने
लगती है, नौकरी में आ
रही परेशानियों से मुक्ति के साथ साथ प्रसन्नता एवं
प्रमोशन की राह पर जाया जा सकता है और
बेहतर भविष्य की ओर बढ़ा जा सकता है।
श्री कृष्ण
जी की गीता के अनुसार कुछ
भी फल प्राप्त करने के लिए कर्म करना सबसे
ज्यादा जरूरी है। ऐसा करने पर बहुत
ही जल्द आपकी मनोकामनाएं अवश्य
ही पूरी हो जाएंगी।
इस मंदिर की विशेषता है कि यहां प्रणाम करने
वालों को एक साथ त्रिदेव का आशीर्वाद प्राप्त
होता है। भगवान दत्तात्रेय जी भोले नाथ के समान
भोले हैं, विष्णु जी जैसे
भविष्यदर्शी एवं तीव्रबुद्धि और जगत
पिता ब्रह्मा जैसे मनीषी पंडित हैं।
इसी कारण वश उन्हें हर्षित करना अत्यधिक
सरल है। उनके समक्ष भक्त
जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण
हो जाती है।
रोजगार के अतिरिक्त चर्म रोगों से निजात पाने के लिए
भी यह मंदिर किसी वरदान से कम
नहीं है। भगवान दत्तात्रेय
जी की आरती के उपरांत
पंडित जी वहां उपस्थित श्रद्धालुओं पर पवित्र जल
का छिड़काव करते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र जल से
त्वचा संबंधित रोगों से हमेशा के लिए निजात मिल जाता है।
इस मंदिर को नर्मदा किनारे स्वामी वासुदेवानंद महाराज
नाम के साधु ने स्थापित किया था। वह प्रतिदिन भगवान दत्तात्रेय
जी को गुड़ और मूंगफली का भोग लगाते
थे। धीरे धीरे
यहां भक्तों की संख्या में वृद्धि होने
लगी। भगवान दत्तात्रेय जी के मंदिर
की अद्भुत और अलौकीक शक्ति बहुत
ज्यादा है। आप जो भी मन्नतें या मुरादें भगवान
दत्तात्रेय जी के दरबार में लेकर जाते हैं उन
सभी को वह अवश्य पूरा करते हैं। साल भर
यहां भक्त गण दर्शनों के लिए आते हैं और इस स्थान से
कभी कोई खाली हाथ
नहीं जाता।
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