चतुर्थ मंगल—
कुन्डली से चौथा भाव सुखों का भाव
है,इसी भाव से मानसिक
विचारों को देखा जाता है,माता के लिये और रहने वाले मकान के लिये
भी इसी भाव से
जाना जाता है,यही भाव वाहनों के लिये और
यही भाव
पानी तथा पानी वाले साधनों के लिये
माना जाता है,घर के अन्दर नींद निकालने का भाव
भी चौथा है.सहचर के भाव से यह भाव कर्म
का भाव होता है,जब जातक एक चौथे भाव में मंगल होता है
तो जातक का स्वभाव चिढचिढा होता है वह जानपहिचान वाले
लोगों से ही लडता रहता है,जातक के निवास स्थान
में इसी मंगल के कारण लोग कुत्ते
बिल्ली की तरह झगडा करने वाले होते
है,हर व्यक्ति उस जातक के घर का अपने अपने तर्क
को ताकत से देना चाहता है,अक्सर वाहन चलाते वक्त साथ में
चलने वाले वाहनों के प्रति आगे जाने की होड
भी इसी मंगल वाले लोग करते है,और
जरा सी चूक होने के साथ
ही या तो सीधे अस्पताल जाते है या फ़िर
वाहन को क्षतिग्रस्त करते हैं। सहचर के कार्य
भी तमतमाहट से भरे होते है,जातक
की माता सहचर के कार्यों से हमेशा रुष्ट
रहती है,जातक के शरीर में
पानी की कमी होती है,वह
अपने सहचर को कन्ट्रोल में रखना चाहता है,अपने पिता के
कार्यों में दखल देने वाला और बडे भाई तथा दोस्तों के साथ
सीधे रूप में प्रतिद्वंदी के रूप में सामने
आता है,सहचर के परिवार वालों से भी वह
उसी प्रकार से व्यवहार करता है जैसे कोई
सेनापति अपने जवानों को हमेशा सेल्यूट मारने के लिये विवश
करता है,जातक को घर वालों से अधिक बाहर वालों से अधिक मोह
होता है और जातक का स्वभाव सहचर के
लिये,शरीर,मन,और शिक्षा के
प्रति भी रुष्ट रहता है। मंगल के चौथे भाव में होने
का एक मतलब और होता है कि जातक का दिल शरबत
की तरह मीठा होता है,और वह
जातक को जरा जरा सी बातों के अन्दर चिपकन पैदा कर
देता है,उसे हर कोई पी जाना चाहता है।
कुन्डली से चौथा भाव सुखों का भाव
है,इसी भाव से मानसिक
विचारों को देखा जाता है,माता के लिये और रहने वाले मकान के लिये
भी इसी भाव से
जाना जाता है,यही भाव वाहनों के लिये और
यही भाव
पानी तथा पानी वाले साधनों के लिये
माना जाता है,घर के अन्दर नींद निकालने का भाव
भी चौथा है.सहचर के भाव से यह भाव कर्म
का भाव होता है,जब जातक एक चौथे भाव में मंगल होता है
तो जातक का स्वभाव चिढचिढा होता है वह जानपहिचान वाले
लोगों से ही लडता रहता है,जातक के निवास स्थान
में इसी मंगल के कारण लोग कुत्ते
बिल्ली की तरह झगडा करने वाले होते
है,हर व्यक्ति उस जातक के घर का अपने अपने तर्क
को ताकत से देना चाहता है,अक्सर वाहन चलाते वक्त साथ में
चलने वाले वाहनों के प्रति आगे जाने की होड
भी इसी मंगल वाले लोग करते है,और
जरा सी चूक होने के साथ
ही या तो सीधे अस्पताल जाते है या फ़िर
वाहन को क्षतिग्रस्त करते हैं। सहचर के कार्य
भी तमतमाहट से भरे होते है,जातक
की माता सहचर के कार्यों से हमेशा रुष्ट
रहती है,जातक के शरीर में
पानी की कमी होती है,वह
अपने सहचर को कन्ट्रोल में रखना चाहता है,अपने पिता के
कार्यों में दखल देने वाला और बडे भाई तथा दोस्तों के साथ
सीधे रूप में प्रतिद्वंदी के रूप में सामने
आता है,सहचर के परिवार वालों से भी वह
उसी प्रकार से व्यवहार करता है जैसे कोई
सेनापति अपने जवानों को हमेशा सेल्यूट मारने के लिये विवश
करता है,जातक को घर वालों से अधिक बाहर वालों से अधिक मोह
होता है और जातक का स्वभाव सहचर के
लिये,शरीर,मन,और शिक्षा के
प्रति भी रुष्ट रहता है। मंगल के चौथे भाव में होने
का एक मतलब और होता है कि जातक का दिल शरबत
की तरह मीठा होता है,और वह
जातक को जरा जरा सी बातों के अन्दर चिपकन पैदा कर
देता है,उसे हर कोई पी जाना चाहता है।
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