Monday, April 14, 2014

दाम्पत्य जीवन-- कामवासना एवं मंगल-शुक्र


दाम्पत्य जीवन-- कामवासना एवं मंगल-शुक्र
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ज्योतिष शास्त्र एवं अनुभव में दाम्पत्य जीवन में शुक्र-मंगल का सम्बन्ध,युति का परिणाम अच्छे नहीं देखे गए हैं.शारीरक सम्बन्ध,काम शक्ति,कामवेश ,काम सुख के लिए जातक कैसा आचरण बनाएगा,इसके लज्जास्पद कुप्रभाव अनुभव व शास्त्रों में बताये गए हैं.
शुक्र-मंगल की युति,दृष्टी सम्बन्ध,समसप्तक,चतुर्थ-दशम सम्बन्ध,नक्षत्र सम्बन्ध,नवांश सम्बन्ध आदि को बहुत ही गंभीरता से अध्यन करना चाहिए.बल्कि देखने में यह भी आया है कि अकेले मंगल ही सप्तम में उच्च राशि,स्वराशिस्थ है पाप ग्रह से दृष्ट है तो जातक कामांध हो जाता है.
जातक की कुण्डली में शुक्र-मंगल परस्पर केंद्र में हों,शुक्र यदि मंगल की राशि में और नवांश में हो या मंगल से युक्त हो या दृष्ट हो तब भी इतना कामांध होता है कि अप्राकृतिक तरीके भी अपनाता है.मंगल-शुक्र की युति २ रे भाव में होने से जातक मुख मैथुन करता है.
मेरे विचार से मिलान के समय लड़का-लड़की दोनों की कुण्डली में यह गुण-अवगुण देखने चाहिए.वर्ना,एक उदाहरण स्वरूप......मंगल जब शनि से सम्बन्ध बनाता है खासकर सप्तम में तब दोनों में किसी एक की मृत्यु सम्भोग से ही संदेहजनक स्तिथ में होती है.मांगलिक होना या गुण मिलान में अच्छा होना ही पर्याप्त नहीं है.
इसके लिए त्रिशांश कुण्डली का भी अगर अध्यन किया जाए तो बहुत ही कारगर साबित हो सकता है.इसमें दोनों के आचरण देख जाते हैं.जिसका निर्धारण लग्न एवं चन्द्रमा से किया जाता है क्यूंकि लग्न जातक है तो चन्द्रमा उसकी सोच है.
वैवाहिक जीवन में मंगल जितना प्रभाव देता है वैसा ही प्रभाव अन्य भावों में भी अपने कारकत्व का फल करता है.संतान बाधा,शिक्षा में बाधा,चोट-चपेट,ऋण-कर्ज,रोग व्याधियां खून खराबा,हत्या,मारकाट,जेल जाना आदि में इसकी स्तिथी से जाना जा सकता है.

1 comment:

  1. Ydi mangal shukr ki yuti 4 bhav mei aur rahu 7 bhav mei ho to uska matlab aur upaye bataye

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