Wednesday, July 2, 2014

फ़ेंगशूई और वास्तुदोष निवारण

* फ़ेंगशूई और वास्तुदोष निवारण :
- चीन , जापान , कोरिया और दक्षिण- पूर्व एशिया में वास्तुशास्त्र को फ़ेंगशूई कहा जाता है. वायु और
पानी पर आधारित इस वास्तुकला में वस्तुओ की सही जमावट पर ध्यान
दीया जाता है . यह विध्या बौद्ध धर्म की देन है. जो मुलभूत तो भारतीय
स्थापत्य कला का ही आधार है. पाकृतिक तत्व जैसे की पानी , अग्नि , भूमि
,धातु और लकडी के पांच तत्वो का संतुलित उपयोग कर के भवन निर्माण किया जाता है.
भारतीय संस्कृति इसी पंचमहाभूत अग्नि , पृथ्वी , वायु, जल और आकाश
तत्वो पर रची हुयी है.
> वास्तुदोष निवारण के लिये फ़ेंगशूई की निम्न वस्तुओ का प्रयोग बहोत ही लाभदायक
है.
१ ) क्रिस्टल बोल : बिना रंगवाले पारदर्शक स्फ़टिक के गोले को क्रिस्टल बोल
कहा जाता है. इस प्रकार का क्रिस्टल बोल घर, ओफ़िस , दुकान के स्थान
पर जहा अशुभ उर्जा यानी वास्तुदोष हो ऐसी
जगह पर अथवा जहा उर्जा की अधिक जरुरत हो
ऐसी जगह पर लटकाया जाता है. जिससे इस गोले में से प्रकाश
का परावर्तन हो के अशुभ उर्जा दूर हो जाती है और उस
जगह पर शुभ उर्जा का आवारण होता है.
३) घंटीया : ओफ़िस के दरवाजे में या घर में मधुर और कर्णप्रिय
आवाजवाली घंटीया सकारात्मक ध्वनि उत्पन्न
करती है जिसे शुभ माना जाता है. जब प्रवेशद्वार जरुरत से
अधिक बडा हो तब नकारात्मक उर्जाओ का प्रवेश होने से वातावरण
बीगड जाता है और वास्तुदोष उत्पन्न होता है. जिसके
निवारण के लीये इस तरह की घंटीयो का
उपयोग कीया जाता है.
५)पैड -पौधे : पैड - पौधे सजीव सृष्टि की
जीवंत उर्जा है. पैड - पौधे अशुभ उर्जाओ को समतुलित कर के
उसे शुभ उर्जा में परावर्तीत करते है. पैड - पौधे व्यक्ति के आनंद
और उत्साह को बढाने का काम करते है और उसकी उन्नति में
सहायरुप होते है. साथ ही आरोग्य और
तंदुरस्ती भी बढाते है. प्रवेशद्वार के सामने पैड
हो तो उसे भी दोषकारक माना जाता है परंतु उसके समांतर
ही दूसरा पैड हो तो वह दोषकारक नही
है.
- दूधवाले , सुखे हुये, जले हुये, कांटेवाले पैड घर आंगन में रखने
नही चाहिये . घर आंगन में तुलसी,
मनीवेल , सुगंधित पुष्पोवाले पौधे लगाने से मानसिक शांति प्राप्त
होती है.
७ ) मछली घर : भारतीय संस्कृति में
मछ्लीयो को भी पवित्र माना गया है. बौद्ध धर्म में
मछ्लीयो को समुद्र देव का प्रतिक माना गया है.
मछ्लीयो की अनेक जाती
होती है. वह कुदरती सौंदर्य में बढावा
करती है. प्राणवायु और जल उर्जा का समन्वय कर के
मछली घर की प्रकृति को जींवत स्वरुप
देती है. इसलीये मछली घर का प्रयोग
वास्तुदोष निवारण के लीये किया जाता है.
- कोमर्शियल सेन्टर में केश काउन्टर के पास ही
मछली घर रखना सौभाग्य का सूचक माना जाता है.
मछली घर में विषम संख्या ( ३ , ५ , ७ , ९ , ११ ) की संख्या
में मछलीयाँ रखे. मछली घर में जल एकदम स्वच्छ
रखे.
९ ) तीन पेरोवाला मेंढ़क : चाईनीझ वास्तु में
तीन पेरोवाले मेंढ़क को आर्थिक समृद्धि का प्रतिक माना जाता है.
यह मेंढ़क अष्टकोण आकार के आसन पर जमीन से
थोडी उंचाई पर और केशबोक्स के पास अथवा शुभ जगह पर रखा
जाता है. मेंढ़क के मुख में असली सिक्का रखा जाता है. इस
मेंढ़क को प्रवेशद्वार के सन्मुख ना रखे.
१०) त्रिशूल - ॐ - स्वस्तिक : हिन्दु संस्कृति के यह
तीन शुभ और प्रेरणादायी प्रतिक है. जो
आत्मविश्वास और एकाग्रता बढाने का कार्य करते है. सूर्या उर्जा के गोले में
मध्यभाग में यह प्रतिक रखे जाते है. शिव और शक्ति की
जीवंत उर्जा स्त्रोत के उसमें दर्शन होते है. श्रद्धा और
विश्वास के साथ दर्शन करने से व्यक्ति की प्रगति
होती है. वास्तुदोष निवारण में इस का उपयोग करने से
आसुरी शक्तिया दूर रेहती है.
२ ) दर्पण : दर्पण का उपयोग अशुद्ध उर्जा के प्रभाव को दूर करने के
लीये कीया जाता है. दर्पण का उपयोग पूर्व- उत्तर
दिशा तरफ़ की दिवार पर ही करना चाहिये . जब
मकान के पास रस्ता आके रुक जाता हो तो तब उसके कारण वास्तुदोष होता
है. ऐसे में भवन की बहार की दिवार पर दर्पण को
लगाने से नकारात्मक उर्जा भवन में आने से अटकती है.
- जब प्लोट कटा हुआ हो तब भी वास्तुदोष होता है.
ऐसी स्तिथी में भवन के भीतर
की तरफ़ दर्पण लगाने से वास्तुदोष दूर होता है.
- भवन के आसपास बहुमाली इमारत बनी हो या
फ़िर सकडे रस्ते पर भवन के सामने की ओर बडी
इमारत हो तो तब भी वास्तुदोष होता है. ऐसी
स्तिथी में घर की छत पर इस तरह से दर्पण लगाना
चाहिये की जिससे बहुमाली इमारत की
छाया उस दर्पण पर पडे और नकारात्मक उर्जा परावर्तित हो जाये.
४) लाईट: प्रकाश अंधकारमय वास्तुदोष को दूर करता है. ओफ़िस या भवन
की जगह जहा से कटती हो ऐसे स्थान पर
अंधेरा होता है. जिससे वास्तुदोष उत्पन्न होता है. ऐसे स्थान पर लाईट
रखने से वह स्थान प्रकाशमय होने से वास्तुदोष रेहता
नही है. इसी तरह कोमर्शियल संस्था के
साईनबोर्ड को भी लाईट द्वारा प्रकाशित करने से शुभ उर्जा उत्पन्न
होती है. सूर्य की कुदरती
रोशनी जहा पहुचती न हो ऐसी
अंधकारमय जगहो पर कृत्रिम रोशनी करने से शुभ उर्जा उत्पन्न
होती है. घर का ईशान कोण भी अंधकारमय
रेहता हो तो वह भी दोष माना जाता है. अत : ईशान कोण को
प्रकाशित करने के लीये नियोन लेम्प का उपयोग करना चाहिये जिससे
शुभ उर्जा प्राप्त होती है.
६) बांस या बासुरी : बांस को सदैव ही पवित्र माना
जाता है. बांस या बासुरी को शांति, समृद्धि , सकारात्मक उर्जा और
उन्नति का प्रतीक मानकर घर, ओफ़िस या व्यापार के स्थान पर
स्थापित करना चाहिये .
- मकान में बीम के नीचे के वास्तुदोष निवारण के
लीये बांसुरी को लाल कपडे में लपेटकर त्रिकोणाकृति में
बीम की दोनो तरफ़ लटकाया जाता है.
बांसुरी का मुल नीचे की तरफ़ रहे उस
तरह से लटकाया जाता है. घर में बांस का उपयोग कपडे सुकाने के
लीये कभी भी करना नहि चाहिये . जब
ओफ़िस में बिम के नीचे बैठकर काम करना होता है तब टेन्शन
रेहता है. पढाई के लीये बीम के नीचे
बैठा जाये तब मन एकाग्र नही रेहता है. जब
बीम के नीचे डाईनींग टेबल हो तो तब
वहा भोजन करने से पाचनशक्ति कम हो जाती है.
८) लाफ़िंग बुद्धा : फ़ेंगशूई वास्तुदोष निवारण में लाफ़िंग बुद्ध का बहोत
ही उपयोग होता है. फ़ेंगशूई में प्राण उर्जा "ची"
को बहोत महत्व दीया गया है. इस प्राण उर्जा के अद्रश्य
स्त्रोत के वाहक लाफ़िंग बुद्ध है. "ची" मुख्यद्वार में से
प्रवेश करते है ऐसी मान्यता है.
इसीलीये लाफ़िंग बुद्ध को भवन, दुकान या ओफ़िस के
सिर्फ़ मुख्य प्रवेशद्वार की अंदर की तरफ़ आगंतूक
को दीखे इस तरह योग्य उंचाई पर रखा जाता है. जिस के कारण
इस मूर्ति में से नीकलते हुये शुभ तरंगो की असर
आगंतुक मानस पर पडती है. जिस से आनेवाले व्यक्ति के विचारो
में शुभत्व का परिवर्तन आता है. भवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार
होता है. लाफ़िंग बुद्ध के साथ आनंदित बच्चो की
तस्वीर भी रख सकते है.

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