श्री सौभाग्य वृद्धि प्रयोग -:
[१] रवि -पुष्य योग में आमंत्रित /निष्कासित और प्राण प्रतिष्ठित ,मंत्र
सिद्ध श्वेतार्क मूल की पूजा करने अथवा उसका टुकड़ा ताबीज में भरकर
बाजू पर धारण करने
से श्री सौभाग्य की प्राप्ति होती है ,
[२] मंत्र सिद्ध बहेड़ा का पत्ता और मूल भंडार -तिजोरी-गल्ले-संदूक
अथवा घर के किसी पवित्र स्थल में रखने से धन-धान्य की वृद्धि होती
है ,व्यापारिक कार्यों
में तेजी आती है ,समृद्धि होती है ,
[३] श्वेत ओंगा की अभिमंत्रित मूल पास में रखने से लाभ-समृद्धि और
कल्याण की प्राप्ति होती है |
[४] मंत्र सिद्ध निर्गुन्डी का समूचा पौधा ,पीली सरसों के साथ पील
े कपडे की पोटली में बांधकर रविपुष्य योग में अथवा गुरु पुष्य योग
में दूकान के दरवाजे में लटका
देने से व्यापार में बहुत लाभ होता है ,यह परम सम्रिद्धिकारी प्रयोग है ,
[५] सहदेई मूल को लाल कपडे में लपेटकर तिजोरी -अन्न भंडार -
आभूषण पेटिका आदि में रखने से धन संपत्ति में आशातीत वृद्धि
होने लगती है ,दूकान में रखने से कारोबार में तेजी आती है ,पूजा
स्थान में रख पूजा करने से घर में खुशहाली आती है |.
सिद्ध श्वेतार्क मूल की पूजा करने अथवा उसका टुकड़ा ताबीज में भरकर
बाजू पर धारण करने
से श्री सौभाग्य की प्राप्ति होती है ,
[२] मंत्र सिद्ध बहेड़ा का पत्ता और मूल भंडार -तिजोरी-गल्ले-संदूक
अथवा घर के किसी पवित्र स्थल में रखने से धन-धान्य की वृद्धि होती
है ,व्यापारिक कार्यों
में तेजी आती है ,समृद्धि होती है ,
[३] श्वेत ओंगा की अभिमंत्रित मूल पास में रखने से लाभ-समृद्धि और
कल्याण की प्राप्ति होती है |
[४] मंत्र सिद्ध निर्गुन्डी का समूचा पौधा ,पीली सरसों के साथ पील
े कपडे की पोटली में बांधकर रविपुष्य योग में अथवा गुरु पुष्य योग
में दूकान के दरवाजे में लटका
देने से व्यापार में बहुत लाभ होता है ,यह परम सम्रिद्धिकारी प्रयोग है ,
[५] सहदेई मूल को लाल कपडे में लपेटकर तिजोरी -अन्न भंडार -
आभूषण पेटिका आदि में रखने से धन संपत्ति में आशातीत वृद्धि
होने लगती है ,दूकान में रखने से कारोबार में तेजी आती है ,पूजा
स्थान में रख पूजा करने से घर में खुशहाली आती है |.
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