मनुष्य बोधिक प्राणी होने के नाते
किसी भी समय काम किये
बिना नहीं रहता है लेकिन समय कि गति को पहचाने
बिना जब कार्य निष्फल होते हैं तो शास्त्र याद आता है जिसमे
परतेक कार्य के लिए शुभ महूर्त का उल्लेख किया गया है
मुहूर्त बताते हैं कि समय का लाभ किस तरह उठाया जा सकता है
और अशुभ घड़ियों से किस तरह बचा जा सकता है
शुक्ल या कृषण पक्ष के मंगलवार को पड़ने
वाली त्रितय,अष्टमी या तेरस
को यदि कानूनी दावा किया जाये तो सफलता निश्चित है
अमावस्या किसी भी शुभ काम कि शुरुआत
करने के लिए शुभ
नहीं मानी जाती
किसी भी नए कार्य को आरम्भ करने के लिए
ऐसे दिनों को टालना चाहिय जिनमे सूर्य नयी राशि में परवेश
करता हो जैसे हर माह कि सक्रांति , ये दिन मंत्र सिद्धि , तांत्रिक
सिद्धि के लिए
उपयोगी मानी जाती है
मुहूर्तो क चयन में तिथियाँ भी विशेष महत्व
रखती है , जब सूर्य और चंद्रमा समान अंशो पर होते
हैं तो अमावस्या होती है और जब १८०
डिग्री पर होते हैं तो पूर्णिमा होती है सूर्य
और चंद्रमा के बारह अंश कि दूरी से एक
तिथि बनती है तिथियां १,६,११ तिथियों को नंदा कहते हैं
२,७,१२ को भद्रा , 4,9,14 को रिक्ता और ५,१०,१५ को पूर्णा कहते
हैं.
मुहूर्त सबंधी कुछ ज़रूरी बातें :-》》
१.शनिवार को दायर किया गया मुकदम्मा लम्बा खिचता है
२.मुकदम्मा मंगलवार को दायर नहीं करना चाहिए
३.वक्री गुरु का २८ दिन का समय विवाह हेतु अशुभ
होता है
४.अमावस्या का दिन विवाह हेतु ठीक
नहीं है
५.यात्रा के लिए
रिक्ता तिथि को यात्रा नहीं करनी चाहिए
६.कन्या के विवाह के लिए गुरु का गोचर ४,८,१२ के लिए अशुभ
माना गया है
७.ज्येष्ठ संतान का ज्येष्ठ मास में विवाह अशुभ होता है
मनुष्य बोधिक प्राणी होने के नाते
किसी भी समय काम किये
बिना नहीं रहता है लेकिन समय कि गति को पहचाने
बिना जब कार्य निष्फल होते हैं तो शास्त्र याद आता है जिसमे
परतेक कार्य के लिए शुभ महूर्त का उल्लेख किया गया है
मुहूर्त बताते हैं कि समय का लाभ किस तरह उठाया जा सकता है
और अशुभ घड़ियों से किस तरह बचा जा सकता है
शुक्ल या कृषण पक्ष के मंगलवार को पड़ने
वाली त्रितय,अष्टमी या तेरस
को यदि कानूनी दावा किया जाये तो सफलता निश्चित है
अमावस्या किसी भी शुभ काम कि शुरुआत
करने के लिए शुभ
नहीं मानी जाती
किसी भी नए कार्य को आरम्भ करने के लिए
ऐसे दिनों को टालना चाहिय जिनमे सूर्य नयी राशि में परवेश
करता हो जैसे हर माह कि सक्रांति , ये दिन मंत्र सिद्धि , तांत्रिक
सिद्धि के लिए
उपयोगी मानी जाती है
मुहूर्तो क चयन में तिथियाँ भी विशेष महत्व
रखती है , जब सूर्य और चंद्रमा समान अंशो पर होते
हैं तो अमावस्या होती है और जब १८०
डिग्री पर होते हैं तो पूर्णिमा होती है सूर्य
और चंद्रमा के बारह अंश कि दूरी से एक
तिथि बनती है तिथियां १,६,११ तिथियों को नंदा कहते हैं
२,७,१२ को भद्रा , 4,9,14 को रिक्ता और ५,१०,१५ को पूर्णा कहते
हैं.
मुहूर्त सबंधी कुछ ज़रूरी बातें :-》》
१.शनिवार को दायर किया गया मुकदम्मा लम्बा खिचता है
२.मुकदम्मा मंगलवार को दायर नहीं करना चाहिए
३.वक्री गुरु का २८ दिन का समय विवाह हेतु अशुभ
होता है
४.अमावस्या का दिन विवाह हेतु ठीक
नहीं है
५.यात्रा के लिए
रिक्ता तिथि को यात्रा नहीं करनी चाहिए
६.कन्या के विवाह के लिए गुरु का गोचर ४,८,१२ के लिए अशुभ
माना गया है
७.ज्येष्ठ संतान का ज्येष्ठ मास में विवाह अशुभ होता है
किसी भी समय काम किये
बिना नहीं रहता है लेकिन समय कि गति को पहचाने
बिना जब कार्य निष्फल होते हैं तो शास्त्र याद आता है जिसमे
परतेक कार्य के लिए शुभ महूर्त का उल्लेख किया गया है
मुहूर्त बताते हैं कि समय का लाभ किस तरह उठाया जा सकता है
और अशुभ घड़ियों से किस तरह बचा जा सकता है
शुक्ल या कृषण पक्ष के मंगलवार को पड़ने
वाली त्रितय,अष्टमी या तेरस
को यदि कानूनी दावा किया जाये तो सफलता निश्चित है
अमावस्या किसी भी शुभ काम कि शुरुआत
करने के लिए शुभ
नहीं मानी जाती
किसी भी नए कार्य को आरम्भ करने के लिए
ऐसे दिनों को टालना चाहिय जिनमे सूर्य नयी राशि में परवेश
करता हो जैसे हर माह कि सक्रांति , ये दिन मंत्र सिद्धि , तांत्रिक
सिद्धि के लिए
उपयोगी मानी जाती है
मुहूर्तो क चयन में तिथियाँ भी विशेष महत्व
रखती है , जब सूर्य और चंद्रमा समान अंशो पर होते
हैं तो अमावस्या होती है और जब १८०
डिग्री पर होते हैं तो पूर्णिमा होती है सूर्य
और चंद्रमा के बारह अंश कि दूरी से एक
तिथि बनती है तिथियां १,६,११ तिथियों को नंदा कहते हैं
२,७,१२ को भद्रा , 4,9,14 को रिक्ता और ५,१०,१५ को पूर्णा कहते
हैं.
मुहूर्त सबंधी कुछ ज़रूरी बातें :-》》
१.शनिवार को दायर किया गया मुकदम्मा लम्बा खिचता है
२.मुकदम्मा मंगलवार को दायर नहीं करना चाहिए
३.वक्री गुरु का २८ दिन का समय विवाह हेतु अशुभ
होता है
४.अमावस्या का दिन विवाह हेतु ठीक
नहीं है
५.यात्रा के लिए
रिक्ता तिथि को यात्रा नहीं करनी चाहिए
६.कन्या के विवाह के लिए गुरु का गोचर ४,८,१२ के लिए अशुभ
माना गया है
७.ज्येष्ठ संतान का ज्येष्ठ मास में विवाह अशुभ होता है
मनुष्य बोधिक प्राणी होने के नाते
किसी भी समय काम किये
बिना नहीं रहता है लेकिन समय कि गति को पहचाने
बिना जब कार्य निष्फल होते हैं तो शास्त्र याद आता है जिसमे
परतेक कार्य के लिए शुभ महूर्त का उल्लेख किया गया है
मुहूर्त बताते हैं कि समय का लाभ किस तरह उठाया जा सकता है
और अशुभ घड़ियों से किस तरह बचा जा सकता है
शुक्ल या कृषण पक्ष के मंगलवार को पड़ने
वाली त्रितय,अष्टमी या तेरस
को यदि कानूनी दावा किया जाये तो सफलता निश्चित है
अमावस्या किसी भी शुभ काम कि शुरुआत
करने के लिए शुभ
नहीं मानी जाती
किसी भी नए कार्य को आरम्भ करने के लिए
ऐसे दिनों को टालना चाहिय जिनमे सूर्य नयी राशि में परवेश
करता हो जैसे हर माह कि सक्रांति , ये दिन मंत्र सिद्धि , तांत्रिक
सिद्धि के लिए
उपयोगी मानी जाती है
मुहूर्तो क चयन में तिथियाँ भी विशेष महत्व
रखती है , जब सूर्य और चंद्रमा समान अंशो पर होते
हैं तो अमावस्या होती है और जब १८०
डिग्री पर होते हैं तो पूर्णिमा होती है सूर्य
और चंद्रमा के बारह अंश कि दूरी से एक
तिथि बनती है तिथियां १,६,११ तिथियों को नंदा कहते हैं
२,७,१२ को भद्रा , 4,9,14 को रिक्ता और ५,१०,१५ को पूर्णा कहते
हैं.
मुहूर्त सबंधी कुछ ज़रूरी बातें :-》》
१.शनिवार को दायर किया गया मुकदम्मा लम्बा खिचता है
२.मुकदम्मा मंगलवार को दायर नहीं करना चाहिए
३.वक्री गुरु का २८ दिन का समय विवाह हेतु अशुभ
होता है
४.अमावस्या का दिन विवाह हेतु ठीक
नहीं है
५.यात्रा के लिए
रिक्ता तिथि को यात्रा नहीं करनी चाहिए
६.कन्या के विवाह के लिए गुरु का गोचर ४,८,१२ के लिए अशुभ
माना गया है
७.ज्येष्ठ संतान का ज्येष्ठ मास में विवाह अशुभ होता है
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