इच्छा पूर्ण
हो पाएगी अथवा नहीं जानिए प्रश्न
कुण्डली से!
ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार एकादश/एकादशेश (Eleventh
house/Lord of eleventh house),
बृहस्पति (Jupiter) आपकी प्रश्न
कुण्डली में शुभ होकर स्थित
हों तो आपकी इच्छा पूरी होती हैं.
इच्छापूर्ति से होने वाले लाभ के लिए
आपकी कुण्डली में लग्न/लग्नेश
का शुभ (Auspiciousness of ascendant/Lord of
ascendant for fulfillment of desire is required)
स्थिति में होना आवश्यक माना गया है.
ज्योतिशास्त्रियों के अनुसार
आपकी कुण्डली के एकादश भाव में
जो ग्रह होते हैं उसके अनुरूप
ही आपकी इच्छा साकार
होती हैं. इस संदर्भ में विभिन्न
ग्रहों की स्थिति से विचार करें तो इस भाव में सूर्य
की उपस्थिति होने से सरकार और
सरकारी तंत्र से सम्बन्धित इच्छाओं
की पूर्ति होती है,
इसी प्रकार
आपकी कुण्डली के एकादश भाव में
चन्द्रमा (Moon in eleventh house) उपस्थित है
तो आपकी समाजिक इच्छाएं
पूरी होती हैं. मंगल (Mars in
eleventh house) शुभ होकर उपस्थित होने से अगर
आपके मन में किसी सम्मान एवं पद
की प्राप्ति की इच्छा है
तो आपकी इच्छा पूरी होती है
क्योंकि इस भाव में मंगल शक्तिशाली होता है.
एकादश भाव में बुध (Mercury in eleventh house)
की उपस्थिति इस बात का द्योतक है
कि आपकी इच्छाएं बहुत जल्द
पूरी होंगी और इसमें आपको मित्रों से
सहयोग प्राप्त होगा। आप अगर स्त्री पक्ष से
लाभ की इच्छा रखते हैं
तो आपकी कुण्डली के इस भाव में शुक्र
(Venus in eleventh house)
की उपस्थिति आवश्यक है, शुक्र के इस भाव में
उपस्थित होने से महिला अधिकारी से
भी आपको लाभ मिलता है।
शनि की उपस्थिति (Saturn in eleventh
house) से आपकी इच्छाएं
पूरी होती हैं परंतु इसके लिए
आपको काफी परिश्रम करना होता है. अगर आप
राजनीति के क्षेत्र से सम्बन्धित कोई इच्छा रखते
हैं तो इसकी पूर्ति तभी संभव
हो पाती है
जबकि आपकी कुण्डली के एकादश भाव
में राहु मौजूद हो. आध्यात्मिक इच्छा की पूर्ति के
सम्बन्ध में इस भाव में केतु की स्थिति से विचार
किया जाता है.
ज्योतिषाचार्यों के मतानुसार एकादश भाव में शुभ ग्रह
हों अथवा पाप ग्रह दोंनों ही शुभ फल प्रदान करते
हैं। एकादश भाव पर
ग्रहों की दृष्टि भी इच्छा पूर्ति के
संदर्भ में प्रभाव डालती हैं। इस भाव पर
बृहस्पति एवं चन्द्र (Aspects of Jupiter and Moon)
की दृष्टि शीघ्र एवं निश्चित फल देने
वाली कही जाती है। इस
भाव में कोई भी ग्रह
तभी इच्छा पूर्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं जबकि वे
नीच राशि में हों अथवा एकादशेश नीच
राशि में हों या अस्त हों।
हो पाएगी अथवा नहीं जानिए प्रश्न
कुण्डली से!
ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार एकादश/एकादशेश (Eleventh
house/Lord of eleventh house),
बृहस्पति (Jupiter) आपकी प्रश्न
कुण्डली में शुभ होकर स्थित
हों तो आपकी इच्छा पूरी होती हैं.
इच्छापूर्ति से होने वाले लाभ के लिए
आपकी कुण्डली में लग्न/लग्नेश
का शुभ (Auspiciousness of ascendant/Lord of
ascendant for fulfillment of desire is required)
स्थिति में होना आवश्यक माना गया है.
ज्योतिशास्त्रियों के अनुसार
आपकी कुण्डली के एकादश भाव में
जो ग्रह होते हैं उसके अनुरूप
ही आपकी इच्छा साकार
होती हैं. इस संदर्भ में विभिन्न
ग्रहों की स्थिति से विचार करें तो इस भाव में सूर्य
की उपस्थिति होने से सरकार और
सरकारी तंत्र से सम्बन्धित इच्छाओं
की पूर्ति होती है,
इसी प्रकार
आपकी कुण्डली के एकादश भाव में
चन्द्रमा (Moon in eleventh house) उपस्थित है
तो आपकी समाजिक इच्छाएं
पूरी होती हैं. मंगल (Mars in
eleventh house) शुभ होकर उपस्थित होने से अगर
आपके मन में किसी सम्मान एवं पद
की प्राप्ति की इच्छा है
तो आपकी इच्छा पूरी होती है
क्योंकि इस भाव में मंगल शक्तिशाली होता है.
एकादश भाव में बुध (Mercury in eleventh house)
की उपस्थिति इस बात का द्योतक है
कि आपकी इच्छाएं बहुत जल्द
पूरी होंगी और इसमें आपको मित्रों से
सहयोग प्राप्त होगा। आप अगर स्त्री पक्ष से
लाभ की इच्छा रखते हैं
तो आपकी कुण्डली के इस भाव में शुक्र
(Venus in eleventh house)
की उपस्थिति आवश्यक है, शुक्र के इस भाव में
उपस्थित होने से महिला अधिकारी से
भी आपको लाभ मिलता है।
शनि की उपस्थिति (Saturn in eleventh
house) से आपकी इच्छाएं
पूरी होती हैं परंतु इसके लिए
आपको काफी परिश्रम करना होता है. अगर आप
राजनीति के क्षेत्र से सम्बन्धित कोई इच्छा रखते
हैं तो इसकी पूर्ति तभी संभव
हो पाती है
जबकि आपकी कुण्डली के एकादश भाव
में राहु मौजूद हो. आध्यात्मिक इच्छा की पूर्ति के
सम्बन्ध में इस भाव में केतु की स्थिति से विचार
किया जाता है.
ज्योतिषाचार्यों के मतानुसार एकादश भाव में शुभ ग्रह
हों अथवा पाप ग्रह दोंनों ही शुभ फल प्रदान करते
हैं। एकादश भाव पर
ग्रहों की दृष्टि भी इच्छा पूर्ति के
संदर्भ में प्रभाव डालती हैं। इस भाव पर
बृहस्पति एवं चन्द्र (Aspects of Jupiter and Moon)
की दृष्टि शीघ्र एवं निश्चित फल देने
वाली कही जाती है। इस
भाव में कोई भी ग्रह
तभी इच्छा पूर्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं जबकि वे
नीच राशि में हों अथवा एकादशेश नीच
राशि में हों या अस्त हों।
No comments:
Post a Comment