:::::::::::::टोने-टोटके भी प्रारब्ध बदल सकते
हैं :::::::::::::::
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लोग कहते हैं की टोन-टोटकों से कुछ
नहीं होता ,जो होना है वह होकर रहेगा |जो भाग्य में
लिखा है ,जो पूर्व कर्मो के अनुसार प्रारब्ध बना है वह
होगा ही चाहे कुछ भी किया जाए |यह
गलत धरना है ,यह पूर्ण भाग्यवादियों की भाषा है |
ऐसी विचारधाराओं के लोग अच्छा होने पर खुद को श्रेय
और गलत होने पर भाग्य को श्रेय देते रहते हैं |हम
सभी प्रकृति के अंग हैं ,यहाँ प्रत्येक
क्रिया की एक निश्चित प्रतिक्रिया होती है |
जिस प्रकार पूर्वकृत कर्मो की प्रतिक्रिया स्वरुप आज
का प्रारब्ध बना है ,उसी प्रकार कुछ क्रियाएं
यदि विपरीत दिशा में की जाए जो तात्कालिक
प्रभाव रखती हों तो इन प्रारब्धों में
भी कमी की जा सकती है
अथवा प्रारब्ध की दिशा में क्रिया करके
उसकी गति बढ़ा दी जाए
तो प्रारब्धों की भी गति और समय बढ़
सकता है |प्रारब्ध जानने की कई विधिया जैसे ज्योतिष
आदि प्रचलित है |इनके अनुसार किये गए टोन टोटके इनको प्रभावित
करते हैं |टोना किसी भी अनुष्ठानिक और
विधिपूर्वक की गयी क्रिया को कहते
हैं ,जिनमे सामान्यतया प्रकृति की उच्च स्तर
की शक्तियों का सहयोग लिया जाता है जबकि टोटका छोटे
सामान्य उपाय हैं जो समय समय पर किये जाते हैं |
यह समस्त ब्रह्माण्ड एक शक्ति से संचालित है |ब्रह्माण्ड
की शक्ति से ही ग्रहों पर
प्रकृति की शक्ति नियंत्रण करती है |
प्रकृति [ब्रह्माण्ड] की शक्ति प्रत्येक
कण ,जीव ,वनस्पति ,जल ,वायु में व्याप्त है |
यही शक्ति या उर्जा इन टोन -टोटकों में
भी कार्य करती है |मानसिक
शक्ति की उर्जा ,वस्तु की ऊर्जा ,विशेष गृह
स्थितियों से उत्पन्न विशेष उर्जा ,वातावरणीय
शक्तियों की उर्जा ,ध्वनि की ऊर्जा आदि का ही संयोजन
इन टोन-टोटकों में भी होता है ,जिसे एकीकृत
करके लक्ष्य पर प्रक्षेपित किया जाता है |
प्रत्येक जीव ,वनस्पति के शरीर में
प्रकृति की उर्जा संरचना के अनुरूप
ही उर्जा परिपथ निर्मित होता है |मनुष्य
का शरीर इस ऊर्जा परिपथ से ही संचालित
होता है |इसका उर्जा चक्र निर्धारित और निश्चित है |यह
प्रकृति की देंन है |इसी उर्जा चक्र के
अनुसार ही उसे सभी कर्म करने होते है |
उर्जा चक्र की इस व्यवस्था में संघर्षशील
कर्म द्वारा या तकनिकी द्वारा उर्जा व्यवस्था में परिवर्तन
किया जा सकता है |क्योकि यह
भी प्रकृति की एक
ऊर्जा व्यवस्था ही है ,और इसमें अगर
दूसरी ऊर्जा को प्रक्षेपित कर दिया जाए तो इस
व्यवस्था में परिवर्तन हो सकता है |जब उर्जा चक्र में परिवर्तन
होगा तो प्रारब्ध भी प्रभावित
होगा ही ,क्योकि यह
भी ऊर्जा व्यवस्था से ही संचालित होता है
|
निश्चित समय ,स्थान ,दिशा ,सामग्री ,देवता ,भाव ,उद्देश्य
के साथ प्रबल मानसिक शक्ति से जब कोई
क्रिया की जाती है तो उससे एक विशिष्ट और
अति तीब्र उर्जा या शक्ति उत्पन्न
होती है ,जिसमे उपरोक्त
सभी की शक्तियों का संग्रह होता है ,,इसे
जब किसी लक्ष्य पर प्रक्षेपित किया जाता है तो यह
उस लक्ष्य के उर्जा परिपथ को प्रभावित करता है और उससे जुड़
जाता है |इसकी प्रकृति सकारात्मक है तो यह सम्बंधित
परिपथ को सबल बना उसे नई गति और ऊर्जा दे देता है ,और अगर
नकारात्मक है तो उः उस परिपथ को बाधित-रुग्न कर देता है }परिणाम
स्वरुप सम्बंधित व्यक्ति के कर्म-सोच-क्षमता-विचार-व्यवहार-
शारीरिक स्थिति प्रभावित हो जाती है |इसके
फल स्वरुप उपयुक्त अथवा अनुपयुक्त कर्मो के अनुसार कल मिलने
वाले परिणाम आज मिल सकते है अथवा नहीं मिल सकते
हैं |मिलने वाले परिणामो की मात्र भी प्रभावित
हो जाती है |
टोन-टोटके में भी वाही उर्जा विज्ञान काम
करता है जो प्रकृति का उर्जा विज्ञान है |क्योकि जीव
धारियों-वनस्पतियों में भी वाही ऊर्जा विज्ञान
कार्यरत है अतः इन टोन-टोटकों से वह प्रभावित हो जाते हैं |टोन
टोटकों से उत्पन्न ऊर्जा लक्ष्य को प्रभावित कर
वहां की प्रकृति बदल देती है |वाहन
चला रहे एक व्यक्ति द्वारा किसी निर्णय में एक सेकेण्ड
का विलम्ब उसे मौत के मुह में पंहुचा सकता है |
किसी व्यवसायी द्वारा लिया गया एक
सही निर्णय लाखों-करोड़ों का लाभ दे सकता है |
किसी के मुह से निकला एक गलत शब्द
उसकी नौकरी ले भी सकता है
और नौकरी दिला भी सकता है |यह सब
ऊर्जा प्रणाली से उत्पन्न मानसिक स्थिति के उदाहरण
मात्र हैं |
टोन-टोटकों का उपयोग अच्छे और बुरे दोनों रूपों में होता है |इन सब के
पीछे प्रकृति अर्थात तंत्र का ऊर्जा विज्ञान होता है |
टोना अर्थात पूजा-अनुष्ठान-साधना में
तो बड़ी ऊर्जा शक्तियां कार्य करती हैं
जो भाग्य में भी परिवर्तन कर सकती है |
किन्तु टोटकों में भी प्रकृति के आसान किन्तु
प्रभावी विकल्पों का ही चयन
किया जाता है ,जो क्षण-प्रतिक्षण की क्रिया को प्रभावित
करती हैं |चुकी यह उर्जा विज्ञान है और
हर जगह ऊर्जा विज्ञान ही कार्य करता है
अतः परिवर्तन होता है |यदि ऐसा न
होता तो चिकित्सा,औसधी,उपाय ,उपचार का कोई महत्व
ही नहीं होता और यह प्रकृति में
किसी के मष्तिष्क से उत्पन्न
ही नहीं होते और
इनकी अवधारणा ही विक्सित न
होती |क्योकि जब सब कुछ निश्चित
ही होता तो सब खुद नियत
चलता ,प्रकृति ऐसी उर्जा उत्पन्न ही न
होने देती जिससे इनकी अवधारणा विक्सित
हो सके ,,ऋषि-महर्षियों-देवताओं द्वारा इसीलिए पूजा-
उपचार-उपाय-तंत्र का विकास किया गया क्योकि प्रकृति में उर्जा विज्ञान
ही कार्यरत है और इसमें
ऊर्जा द्वारा ही परिवर्तन संभव है |..............
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लोग कहते हैं की टोन-टोटकों से कुछ
नहीं होता ,जो होना है वह होकर रहेगा |जो भाग्य में
लिखा है ,जो पूर्व कर्मो के अनुसार प्रारब्ध बना है वह
होगा ही चाहे कुछ भी किया जाए |यह
गलत धरना है ,यह पूर्ण भाग्यवादियों की भाषा है |
ऐसी विचारधाराओं के लोग अच्छा होने पर खुद को श्रेय
और गलत होने पर भाग्य को श्रेय देते रहते हैं |हम
सभी प्रकृति के अंग हैं ,यहाँ प्रत्येक
क्रिया की एक निश्चित प्रतिक्रिया होती है |
जिस प्रकार पूर्वकृत कर्मो की प्रतिक्रिया स्वरुप आज
का प्रारब्ध बना है ,उसी प्रकार कुछ क्रियाएं
यदि विपरीत दिशा में की जाए जो तात्कालिक
प्रभाव रखती हों तो इन प्रारब्धों में
भी कमी की जा सकती है
अथवा प्रारब्ध की दिशा में क्रिया करके
उसकी गति बढ़ा दी जाए
तो प्रारब्धों की भी गति और समय बढ़
सकता है |प्रारब्ध जानने की कई विधिया जैसे ज्योतिष
आदि प्रचलित है |इनके अनुसार किये गए टोन टोटके इनको प्रभावित
करते हैं |टोना किसी भी अनुष्ठानिक और
विधिपूर्वक की गयी क्रिया को कहते
हैं ,जिनमे सामान्यतया प्रकृति की उच्च स्तर
की शक्तियों का सहयोग लिया जाता है जबकि टोटका छोटे
सामान्य उपाय हैं जो समय समय पर किये जाते हैं |
यह समस्त ब्रह्माण्ड एक शक्ति से संचालित है |ब्रह्माण्ड
की शक्ति से ही ग्रहों पर
प्रकृति की शक्ति नियंत्रण करती है |
प्रकृति [ब्रह्माण्ड] की शक्ति प्रत्येक
कण ,जीव ,वनस्पति ,जल ,वायु में व्याप्त है |
यही शक्ति या उर्जा इन टोन -टोटकों में
भी कार्य करती है |मानसिक
शक्ति की उर्जा ,वस्तु की ऊर्जा ,विशेष गृह
स्थितियों से उत्पन्न विशेष उर्जा ,वातावरणीय
शक्तियों की उर्जा ,ध्वनि की ऊर्जा आदि का ही संयोजन
इन टोन-टोटकों में भी होता है ,जिसे एकीकृत
करके लक्ष्य पर प्रक्षेपित किया जाता है |
प्रत्येक जीव ,वनस्पति के शरीर में
प्रकृति की उर्जा संरचना के अनुरूप
ही उर्जा परिपथ निर्मित होता है |मनुष्य
का शरीर इस ऊर्जा परिपथ से ही संचालित
होता है |इसका उर्जा चक्र निर्धारित और निश्चित है |यह
प्रकृति की देंन है |इसी उर्जा चक्र के
अनुसार ही उसे सभी कर्म करने होते है |
उर्जा चक्र की इस व्यवस्था में संघर्षशील
कर्म द्वारा या तकनिकी द्वारा उर्जा व्यवस्था में परिवर्तन
किया जा सकता है |क्योकि यह
भी प्रकृति की एक
ऊर्जा व्यवस्था ही है ,और इसमें अगर
दूसरी ऊर्जा को प्रक्षेपित कर दिया जाए तो इस
व्यवस्था में परिवर्तन हो सकता है |जब उर्जा चक्र में परिवर्तन
होगा तो प्रारब्ध भी प्रभावित
होगा ही ,क्योकि यह
भी ऊर्जा व्यवस्था से ही संचालित होता है
|
निश्चित समय ,स्थान ,दिशा ,सामग्री ,देवता ,भाव ,उद्देश्य
के साथ प्रबल मानसिक शक्ति से जब कोई
क्रिया की जाती है तो उससे एक विशिष्ट और
अति तीब्र उर्जा या शक्ति उत्पन्न
होती है ,जिसमे उपरोक्त
सभी की शक्तियों का संग्रह होता है ,,इसे
जब किसी लक्ष्य पर प्रक्षेपित किया जाता है तो यह
उस लक्ष्य के उर्जा परिपथ को प्रभावित करता है और उससे जुड़
जाता है |इसकी प्रकृति सकारात्मक है तो यह सम्बंधित
परिपथ को सबल बना उसे नई गति और ऊर्जा दे देता है ,और अगर
नकारात्मक है तो उः उस परिपथ को बाधित-रुग्न कर देता है }परिणाम
स्वरुप सम्बंधित व्यक्ति के कर्म-सोच-क्षमता-विचार-व्यवहार-
शारीरिक स्थिति प्रभावित हो जाती है |इसके
फल स्वरुप उपयुक्त अथवा अनुपयुक्त कर्मो के अनुसार कल मिलने
वाले परिणाम आज मिल सकते है अथवा नहीं मिल सकते
हैं |मिलने वाले परिणामो की मात्र भी प्रभावित
हो जाती है |
टोन-टोटके में भी वाही उर्जा विज्ञान काम
करता है जो प्रकृति का उर्जा विज्ञान है |क्योकि जीव
धारियों-वनस्पतियों में भी वाही ऊर्जा विज्ञान
कार्यरत है अतः इन टोन-टोटकों से वह प्रभावित हो जाते हैं |टोन
टोटकों से उत्पन्न ऊर्जा लक्ष्य को प्रभावित कर
वहां की प्रकृति बदल देती है |वाहन
चला रहे एक व्यक्ति द्वारा किसी निर्णय में एक सेकेण्ड
का विलम्ब उसे मौत के मुह में पंहुचा सकता है |
किसी व्यवसायी द्वारा लिया गया एक
सही निर्णय लाखों-करोड़ों का लाभ दे सकता है |
किसी के मुह से निकला एक गलत शब्द
उसकी नौकरी ले भी सकता है
और नौकरी दिला भी सकता है |यह सब
ऊर्जा प्रणाली से उत्पन्न मानसिक स्थिति के उदाहरण
मात्र हैं |
टोन-टोटकों का उपयोग अच्छे और बुरे दोनों रूपों में होता है |इन सब के
पीछे प्रकृति अर्थात तंत्र का ऊर्जा विज्ञान होता है |
टोना अर्थात पूजा-अनुष्ठान-साधना में
तो बड़ी ऊर्जा शक्तियां कार्य करती हैं
जो भाग्य में भी परिवर्तन कर सकती है |
किन्तु टोटकों में भी प्रकृति के आसान किन्तु
प्रभावी विकल्पों का ही चयन
किया जाता है ,जो क्षण-प्रतिक्षण की क्रिया को प्रभावित
करती हैं |चुकी यह उर्जा विज्ञान है और
हर जगह ऊर्जा विज्ञान ही कार्य करता है
अतः परिवर्तन होता है |यदि ऐसा न
होता तो चिकित्सा,औसधी,उपाय ,उपचार का कोई महत्व
ही नहीं होता और यह प्रकृति में
किसी के मष्तिष्क से उत्पन्न
ही नहीं होते और
इनकी अवधारणा ही विक्सित न
होती |क्योकि जब सब कुछ निश्चित
ही होता तो सब खुद नियत
चलता ,प्रकृति ऐसी उर्जा उत्पन्न ही न
होने देती जिससे इनकी अवधारणा विक्सित
हो सके ,,ऋषि-महर्षियों-देवताओं द्वारा इसीलिए पूजा-
उपचार-उपाय-तंत्र का विकास किया गया क्योकि प्रकृति में उर्जा विज्ञान
ही कार्यरत है और इसमें
ऊर्जा द्वारा ही परिवर्तन संभव है |..............
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