Thursday, April 17, 2014

नौ माह के गर्भ के दौरान शिशु जीवन किन किन गृहों से प्रभावित होता है

नौ माह के गर्भ के दौरान शिशु जीवन किन किन गृहों से
प्रभावित होता है
प्रथम माह:
प्रथम माह शुक्र गृह से संचालित होता है, जो उत्तम व् सुंदर
संतान देता है, - सौंफ और मिश्री का दान व् सेवन करें.
द्वितीय माह:
मंगल - मजबूत स्वस्थ्य व् हड्डियाँ देता है - गुड का दान करें,
लाल वस्त्र न पहनें, सुन्दरकाण्ड का पाठ करें.
तिर्तिया माह:
गुरु - प्रसिधी देता है, संस्कार देता है -
हल्दी न खाएं, दान करें, अच्छा साहित्य पढ़ें, गुरु
का सानिध्य प्राप्त करें, चन्दन का तिलक लगायें.
चतुर्थ माह:
सूर्य - अच्छी वाणी व् तेज़ दिमाग देता है -
गायत्री मंत्र सूर्योदय के समय जपें, जल ज्यादा पियें,
कला का अभ्यास करें.
पंचम माह:
चन्द्रमा - अच्छा व्यवहार देता है व् तेज़ दिमाग प्राप्त होता है -
वैज्ञानिक व् धार्मिक पुस्तकें पढ़ें,
चांदी का कड़ा अथवा छल्ला पहनें.
ठंडी चीजों का सेवन न करें, ओउम नमः शिवाय
का जप करें.
छठा माह:
शनि - उत्तम स्वस्थ्य व् स्नायु तंत्र देता है - कुष्ठ रोगियों के
सेवा करें, चांदी के साथ लोहे का कड़ा या छल्ला पहनें, ५
पीपल के वृक्ष लगायें, गायत्री का जप करें,
लोह्सव का सेवन करें.
सप्तम माह:
बुध - उत्तम त्वचा, फेंफडे व् श्वास तंत्र देता है - हरा चारा गाय
को दें, व् हरी सब्जियों का सेवन करें.
अष्टम माह:
इष्ट - सर्वगुण संतान देतें हैं - अपने इष्ट के साधना करें - गणित
पढ़ें - लेट भोजन न करें - लोहे का कड़ा/छल्ला उतार दें, बेल पत्र
डालकर नहाएं.
नवं माह:
चन्द्रमा - सिर्फ चांदी पहनें - महाम्र्तुन्ज्य का जाप
करें - उजले वस्त्र पहनें.
उपरोक्त उपायों द्वारा एक स्वस्थ्य व् मेधावी संतान
की प्राप्ति की जा सकती है

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