किस स्थिति में रत्न धारण करें ।
ज्योतिष की विडंबना है कि ये ज्यों ज्यों यश प्राप्त करता है त्यों त्यों विवादास्पद होता चला जाता है । हम लोगों की अक्सर शिकायत होती है कि रत्न ने नुकसान किया या लाभ नही पहुंचाया । रत्न के पहनने का वैज्ञानिक सिद्धांत है कि बाह्य वातावरण में उपलब्ध किरणें प्रत्येक मनुष्य पर अलग अलग प्रभाव डालती है उन किरणों को अपनी ग्रेविटी द्वारा दिशा देना रत्न का काम है लेकिन कब ? उत्तर है हम पहचानें कि कुंडली में कौनसी स्थिति किस रत्न की मांग करती है ।
एक बात ये भी ध्यान देने योग्य है कि किन परिस्थिति में कौनसा रत्न नही पहना जाना चाहिए ।
हम कुछ प्रसिद्ध सिद्धांतों के विपरीत है । हम नही बल्कि जेमोलोजिकल सिद्धांत भी अतः इन हालात में रत्न धारण न करें ।
एकः जब ग्रह नीच राशि में हो
दोः जब ग्रह उच्च राशि में हो
तीनः जब ग्रह दुःस्थान षष्ठ, अष्टम द्वादश का प्रतिनिधित्व करें ।
चारः ग्रह पर किस दूसरे ग्रह की दृष्टि है वो शक्तिशाली हो
और भी दूसरे विभिन्न कारण है जो कुंडली की तात्कालिक स्थिति पर निर्भर करते है । अस्त ग्रह यदि कारक हो तो उसका रत्न अवश्य पहनें और उसे शक्ति प्रदान करें , रत्न रोगमूक्त करने की क्षमता भी रखता है इसीलिए हमारे पूर्वज रत्नों की भस्म दवा के तौर पर देते थे ।
एक गलत तथ्य ये भी है कि पुखराज सोने में पहना जाना चाहिए नहीं पुखराज सिर्फ पीत धातु मांगता है और वो पीतल भी है आगे कभी हम इस पर भी चर्चा करेंगे ।
एक बात ये भी ध्यान देने योग्य है कि किन परिस्थिति में कौनसा रत्न नही पहना जाना चाहिए ।
हम कुछ प्रसिद्ध सिद्धांतों के विपरीत है । हम नही बल्कि जेमोलोजिकल सिद्धांत भी अतः इन हालात में रत्न धारण न करें ।
एकः जब ग्रह नीच राशि में हो
दोः जब ग्रह उच्च राशि में हो
तीनः जब ग्रह दुःस्थान षष्ठ, अष्टम द्वादश का प्रतिनिधित्व करें ।
चारः ग्रह पर किस दूसरे ग्रह की दृष्टि है वो शक्तिशाली हो
और भी दूसरे विभिन्न कारण है जो कुंडली की तात्कालिक स्थिति पर निर्भर करते है । अस्त ग्रह यदि कारक हो तो उसका रत्न अवश्य पहनें और उसे शक्ति प्रदान करें , रत्न रोगमूक्त करने की क्षमता भी रखता है इसीलिए हमारे पूर्वज रत्नों की भस्म दवा के तौर पर देते थे ।
एक गलत तथ्य ये भी है कि पुखराज सोने में पहना जाना चाहिए नहीं पुखराज सिर्फ पीत धातु मांगता है और वो पीतल भी है आगे कभी हम इस पर भी चर्चा करेंगे ।
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