वास्तु और सुखी गृहस्थ जीवन
पति पत्नी के सुखी जीवन
के लिये वास्तु की उपयोगिता
आज के भौतिक संसार में मनुष्य अध्यात्म को छोड़कर भौतिक
सुखों के पीछे भाग रहा है। समय के अभाव ने उसे
रिश्तों के प्रति उदासीन बना दिया है। किंतु आज
भी मनुष्य अपने घर में संसार के सारे
सुखों को भोगना चाहता है। इसके लिए हमें वैवाहिक
जीवन को वास्तु से जोड़ना होगा। वास्तव में हम
ऐसा क्या करें कि पति-पत्नी के बीच
अहंकार की जगह प्रेम, प्रतियोगिता के स्थान पर
सानिध्य मिले।
यद्यपि गृहस्थ जीवन में या व्याहारिक
जीवन में कोई भी छोटा सा कारण एक बड़े
कारण में परिवर्तित हो जाता है। चाहे वह आर्थिक हो या घर
के अन्य सदस्यों को लेकर हो। इसका सीधा प्रभाव
पति-पत्नी के आपसी संबंधों पर
पड़ता है। इसलिए घर का वातावरण ऐसा होना चाहिए
कि ऋणात्मक शक्तियां कम तथा सकारात्मक शक्तियां अधिक
क्रियाशील हों। यह सब वास्तु के
द्वारा ही संभव हो सकता है।
घर के ईशान कोण का बहुत ही महत्व है।
यदि पति-पत्नी साथ बैठकर पूजा करें तो उनका आपस
का अहंकार खत्म होकर संबंधों में मधुरता बढ़ेगी।
गृहलक्ष्मी द्वारा संध्या के समय
तुलसी में दीपक जलाने से नकारात्मक
शक्तियों को कम किया जा सकता है। घर के हर कमरे के ईशान
कोण को साफ रखें, विशेषकर शयनकक्ष के।
पति-पत्नी में आपस में वैमनस्यता का एक कारण
सही दिशा में शयनकक्ष का न
होना भी है। अगर दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में स्थित
कोने में बने कमरों में आपकी आवास
व्यवस्था नहीं है तो प्रेम संबंध अच्छे के बजाए,
कटुता भरे हो जाते हैं।
शयनकक्ष के लिए दक्षिण दिशा निर्धारित करने का कारण यह
है कि इस दिशा का स्वामी यम, शक्ति एवं
विश्रामदायक है। घर में आराम से सोने के लिए दक्षिण एवं
नैऋत्य कोण उपयुक्त है। शयनकक्ष में पति-
पत्नी का सामान्य फोटो होने के बजाए हंसता हुआ
हो, तो वास्तु के अनुसार उचित रहता है।
घर के अंदर उत्तर-पूर्व दिशाओं के कोने के कक्ष में अगर
शौचालय है तो पति-पत्नी का जीवन
बड़ा अशांत रहता है। आर्थिक संकट व संतान सुख में
कमी आती है। इसलिए शौचालय
हटा देना ही उचित है। अगर हटाना संभव न
हो तो शीशे के एक बर्तन में
समुद्री नमक रखें। यह अगर सील
जाए तो बदल दें। अगर यह संभव न
हो तो मिट्टी के एक बर्तन में सेंधा नमक डालकर
रखें।
घर के अंदर यदि रसोई सही दिशा में
नहीं है तो ऐसी अवस्था में पति-
पत्नी के विचार
कभी नहीं मिलेंगे। रिश्तों में कड़वाहट
दिनों-दिन बढ़ेगी। कारण
अग्नि का कहीं ओर जलना। रसोई घर
की सही दिशा है आग्नेय कोण। अगर
आग्नेय दिशा में संभव नहीं है तो अन्य वैकल्पिक
दिशाएं हैं। आग्नेय एवं दक्षिण के बीच, आग्नेय
एवं पूर्व के बीच, वायव्य एवं उत्तर के
बीच।
अत: यदि हम अपने वैवाहिक जीवन को सुखद एवं
समृद्ध बनाना चाहते हैं और अपेक्षा करते हैं
कि जीवन के सुंदर स्वप्न को साकार कर सकें। इसके
लिए पूर्ण निष्ठा एवं श्रद्धा से वास्तु के उपायों को अपनाकर अपने
जीवन में खुशहाली लाएं।
पति पत्नी के सुखी जीवन
के लिये वास्तु की उपयोगिता
आज के भौतिक संसार में मनुष्य अध्यात्म को छोड़कर भौतिक
सुखों के पीछे भाग रहा है। समय के अभाव ने उसे
रिश्तों के प्रति उदासीन बना दिया है। किंतु आज
भी मनुष्य अपने घर में संसार के सारे
सुखों को भोगना चाहता है। इसके लिए हमें वैवाहिक
जीवन को वास्तु से जोड़ना होगा। वास्तव में हम
ऐसा क्या करें कि पति-पत्नी के बीच
अहंकार की जगह प्रेम, प्रतियोगिता के स्थान पर
सानिध्य मिले।
यद्यपि गृहस्थ जीवन में या व्याहारिक
जीवन में कोई भी छोटा सा कारण एक बड़े
कारण में परिवर्तित हो जाता है। चाहे वह आर्थिक हो या घर
के अन्य सदस्यों को लेकर हो। इसका सीधा प्रभाव
पति-पत्नी के आपसी संबंधों पर
पड़ता है। इसलिए घर का वातावरण ऐसा होना चाहिए
कि ऋणात्मक शक्तियां कम तथा सकारात्मक शक्तियां अधिक
क्रियाशील हों। यह सब वास्तु के
द्वारा ही संभव हो सकता है।
घर के ईशान कोण का बहुत ही महत्व है।
यदि पति-पत्नी साथ बैठकर पूजा करें तो उनका आपस
का अहंकार खत्म होकर संबंधों में मधुरता बढ़ेगी।
गृहलक्ष्मी द्वारा संध्या के समय
तुलसी में दीपक जलाने से नकारात्मक
शक्तियों को कम किया जा सकता है। घर के हर कमरे के ईशान
कोण को साफ रखें, विशेषकर शयनकक्ष के।
पति-पत्नी में आपस में वैमनस्यता का एक कारण
सही दिशा में शयनकक्ष का न
होना भी है। अगर दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में स्थित
कोने में बने कमरों में आपकी आवास
व्यवस्था नहीं है तो प्रेम संबंध अच्छे के बजाए,
कटुता भरे हो जाते हैं।
शयनकक्ष के लिए दक्षिण दिशा निर्धारित करने का कारण यह
है कि इस दिशा का स्वामी यम, शक्ति एवं
विश्रामदायक है। घर में आराम से सोने के लिए दक्षिण एवं
नैऋत्य कोण उपयुक्त है। शयनकक्ष में पति-
पत्नी का सामान्य फोटो होने के बजाए हंसता हुआ
हो, तो वास्तु के अनुसार उचित रहता है।
घर के अंदर उत्तर-पूर्व दिशाओं के कोने के कक्ष में अगर
शौचालय है तो पति-पत्नी का जीवन
बड़ा अशांत रहता है। आर्थिक संकट व संतान सुख में
कमी आती है। इसलिए शौचालय
हटा देना ही उचित है। अगर हटाना संभव न
हो तो शीशे के एक बर्तन में
समुद्री नमक रखें। यह अगर सील
जाए तो बदल दें। अगर यह संभव न
हो तो मिट्टी के एक बर्तन में सेंधा नमक डालकर
रखें।
घर के अंदर यदि रसोई सही दिशा में
नहीं है तो ऐसी अवस्था में पति-
पत्नी के विचार
कभी नहीं मिलेंगे। रिश्तों में कड़वाहट
दिनों-दिन बढ़ेगी। कारण
अग्नि का कहीं ओर जलना। रसोई घर
की सही दिशा है आग्नेय कोण। अगर
आग्नेय दिशा में संभव नहीं है तो अन्य वैकल्पिक
दिशाएं हैं। आग्नेय एवं दक्षिण के बीच, आग्नेय
एवं पूर्व के बीच, वायव्य एवं उत्तर के
बीच।
अत: यदि हम अपने वैवाहिक जीवन को सुखद एवं
समृद्ध बनाना चाहते हैं और अपेक्षा करते हैं
कि जीवन के सुंदर स्वप्न को साकार कर सकें। इसके
लिए पूर्ण निष्ठा एवं श्रद्धा से वास्तु के उपायों को अपनाकर अपने
जीवन में खुशहाली लाएं।
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