Sunday, August 3, 2014

वृक्षों का रोपण

जो मनुष्य नीम के वृक्ष जितने अधिक लगाता है उतनी अधिक उसकी पीढियां तर जाती है.
शीशम के 11 वृक्ष को सड़क पर लगाने से यह लोक और परलोक दोनों ही संवर जाते है.
कनक चम्पा के 2 वृक्ष लगाने वाले का सर्वार्थ कल्याण हो जाता है.
5 या अधिक महुआ के वृक्षों का रोपण और पालन करने वाला धन प्राप्त करता है. तथा उसे अनुरूप यज्ञों का फल भी प्राप्त होने लगता है.
10 पीपल के वृक्षों का रोपण करने वाला इस लोक में तो कीर्ति प्राप्त करता है, मृत्युपरांत भी मोक्ष को प्राप्त होता है. इसमें संदेह नहीं है
जो भी मनुष्य सड़क के किनारे 2 या 2 से अधिक मौलश्री के वृक्षों का रोपण एवं पालन करता है. वह एक सौ यज्ञों को करने का पुण्य प्राप्त करता है
जो भी मनुष्य 5 या अधिक अशोक वृक्ष का रोपण और पालन करता है, उसके घर परिवार में कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होती है. उसके यहां अचानक कोई बड़ी मुसीबत खड़ी नहीं होती तथा उसे आगामी जन्म में पुण्यात्मा होने का सौभाग्य प्राप्त होता है.
5 या अधिक आम के वृक्षों का रोपण – पालन करने वाला अनेक दुर्लभ यज्ञों के फल को प्राप्त कर सकता है
जो मनुष्य 5 पलास के वृक्षों का रोपण – पालन करते है, उस 10 गौवों के दान के समतुल्य पुण्य लाभ मिलता है. पलास के वृक्षों को सड़क के किनारे अथवा किसी बड़े क्षेत्र में रोपना चाहिए. इसका रोपण घर में नहीं करना चाहिए.
जो भी व्यक्ति सोमवार के दिन, पप्रदोष वाले दिन, शिवरात्री को, श्रावण मॉस में किसी भी दिन अथवा शिवयोग वाले दिन 5 या अधिक बिल्व वृक्षों का रोपण और उसका नियमित पालन भी करता है तो उसे शिवलोक प्राप्त होता है. यदि इन वृक्षों को कोई भी मनुष्य शिव मंदिर में या मंदिर के समीप रोपण करता है तो निश्चय ही वह कोटि कोटि पुण्य का भागीदार तो होता ही है और उसे व् उसके परिवार पर भगवान शिव की असीम अनुकम्पा भी प्राप्त होती है.
जो भी मनुष्य 2 या अधिक हारसिंगार (पारिजात) के पौधों का रोपण श्री हनुमान जी के मंदिर में अथवा नदी के किनारे या किसी भी सामाजिक स्थल पर करता है तो उसे एक लक्ष्य तोला स्वर्णदान के समतुल्य पुण्य प्राप्त होता है तथा उसे जीवन भर श्री हनुमान जी की कृपा मिलती रहती है.
घर में सुख-समृद्धि हेतु एवं वास्तुदोष निवारण हेतु श्वेतार्क गणपति (सफेद आंख), शमी, चाइनापाय, तुलसा, मौलसिरी, हरशृंगार, असली अशोक, मालती चंपा, कनेर, चमेली और केवड़े कदम आदि के पौधे अवश्य लगाएं।

No comments:

Post a Comment