Monday, August 4, 2014

नवग्रहों के लिए विलक्षण वैदिक मंत्र

प्रस्तुत है नवग्रहों के लिए विलक्षण वैदिक मंत्र-
* सूर्य- ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं
मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन् (यजु.
33। 43, 34। 31)
* चन्द्र- ॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते
क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय।
इमममुष्य पुत्रममुष्ये पुत्रमस्यै विश एष
वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा।।
(यजु. 10। 18)
* भौम- ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्।
अपां रेतां सि जिन्वति।। (यजु. 3।12)
* बुध- ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते
सं सृजेधामयं च। अस्मिन्त्सधस्थेन अध्युजत्तरस्मिन् विश्वे
देवा यशमानश्च सीदत।। (यजु. 15।54)
* गुरु- ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद्
द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस
ऋतुप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।। (यजु. 26।3)
* शुक्र- ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं
ब्रह्मणा व्यपित्क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं
विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।। (यजु.
19।75)
* शनि- ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु
पीतये। शं योरभि स्त्रवन्तु न:।। (यजु. 36।12)
* राहु- ॐ कया नश्चित्र आ
भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।। (यजु.
36।4)
* केतु- ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे।
समुषद्भिरजायथा:।। (यजु. 29।37)

No comments:

Post a Comment