पुत्र प्राप्ति के लिए उपाय
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मनपंसद संतान-प्राप्ति के योग
स्त्री के ऋतु दर्शन के सोलह रात तक ऋतुकाल
रहता है,उस समय में ही गर्भ धारण
हो सकता है,उसके अन्दर पहली चार रातें निषिद्ध
मानी जाती है,कारण दूषित रक्त होने के
कारण कितने ही रोग संतान और माता पिता में अपने आप
पनप जाते है,इसलिये शास्त्रों और विद्वानो ने इन चार दिनो को त्यागने
के लिये ही जोर दिया है।
चौथी रात को ऋतुदान से कम आयु वाला पुत्र
पैदा होता है,पंचम रात्रि से कम आयु वाली ह्रदय
रोगी पुत्री होती है,छठी रात
को वंश वृद्धि करने वाला पुत्र पैदा होता है,सातवीं रात
को संतान न पैदा करने
वाली पुत्री,आठवीं रात
को पिता को मारने वाला पुत्र,नवीं रात को कुल में नाम करने
वाली पुत्री,दसवीं रात
को कुलदीपक पुत्र,ग्यारहवीं रात को अनुपम
सौन्दर्य युक्त पुत्री,बारहवीं रात
को अभूतपूर्व गुणों से युक्त पुत्र,तेरहवीं रात
को चिन्ता देने
वाली पुत्री,चौदहवीं रात
को सदगुणी पुत्र,पन्द्रहवीं रात
को लक्ष्मी समान पुत्री,और
सोलहवीं रात को सर्वज्ञ पुत्र पैदा होता है। इसके बाद
की रातों को संयोग करने से पुत्र संतान
की गुंजायश नही होती है।
इसके बाद स्त्री का रज अधिक गर्म होजाता है,और
पुरुष के वीर्य को जला डालता है,परिणामस्वरूप
या तो गर्भपात हो जाता है,अथवा संतान पैदा होते
ही खत्म हो जाती है।
शक्तिशाली व गोरे पुत्र प्राप्ति के लिए
********************-*---****
गर्भिणी स्त्री ढाक (पलाश) का एककोमल
पत्ता घोंटकर गौदुग्ध के साथ रोज़ सेवन करे | इससे बालक
शक्तिशाली और गोरा होता है | माता-
पीता भले काले हों, फिर भी बालक गोरा होगा |
इसके साथ सुवर्णप्राश की २-२ गोलियां लेने से संतान
तेजस्वी होगी |
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मनपंसद संतान-प्राप्ति के योग
स्त्री के ऋतु दर्शन के सोलह रात तक ऋतुकाल
रहता है,उस समय में ही गर्भ धारण
हो सकता है,उसके अन्दर पहली चार रातें निषिद्ध
मानी जाती है,कारण दूषित रक्त होने के
कारण कितने ही रोग संतान और माता पिता में अपने आप
पनप जाते है,इसलिये शास्त्रों और विद्वानो ने इन चार दिनो को त्यागने
के लिये ही जोर दिया है।
चौथी रात को ऋतुदान से कम आयु वाला पुत्र
पैदा होता है,पंचम रात्रि से कम आयु वाली ह्रदय
रोगी पुत्री होती है,छठी रात
को वंश वृद्धि करने वाला पुत्र पैदा होता है,सातवीं रात
को संतान न पैदा करने
वाली पुत्री,आठवीं रात
को पिता को मारने वाला पुत्र,नवीं रात को कुल में नाम करने
वाली पुत्री,दसवीं रात
को कुलदीपक पुत्र,ग्यारहवीं रात को अनुपम
सौन्दर्य युक्त पुत्री,बारहवीं रात
को अभूतपूर्व गुणों से युक्त पुत्र,तेरहवीं रात
को चिन्ता देने
वाली पुत्री,चौदहवीं रात
को सदगुणी पुत्र,पन्द्रहवीं रात
को लक्ष्मी समान पुत्री,और
सोलहवीं रात को सर्वज्ञ पुत्र पैदा होता है। इसके बाद
की रातों को संयोग करने से पुत्र संतान
की गुंजायश नही होती है।
इसके बाद स्त्री का रज अधिक गर्म होजाता है,और
पुरुष के वीर्य को जला डालता है,परिणामस्वरूप
या तो गर्भपात हो जाता है,अथवा संतान पैदा होते
ही खत्म हो जाती है।
शक्तिशाली व गोरे पुत्र प्राप्ति के लिए
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गर्भिणी स्त्री ढाक (पलाश) का एककोमल
पत्ता घोंटकर गौदुग्ध के साथ रोज़ सेवन करे | इससे बालक
शक्तिशाली और गोरा होता है | माता-
पीता भले काले हों, फिर भी बालक गोरा होगा |
इसके साथ सुवर्णप्राश की २-२ गोलियां लेने से संतान
तेजस्वी होगी |
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