Saturday, May 10, 2014

विपत्ति नाश

विपत्ति नाश के लिए निम्न मंत्र की 108 आहुति दें तथा नित्य यथाशक्ति जप धरें।

मंत्र-
राजीव नयन धरें धनु सायक।
भगति विपति भंजन सुखदायक।।
 विविध रोग तथा उपद्रव शांति के लिए मंत्र-

दैहिक दैविक भौतिक तापा,
राम राज नहिं काहुहिं व्यापा।।
जीविका प्राप्ति के लिए-

बिस्व भरन पोषन कर जोई,
ताकर नाम भरत अस होई।।
विद्या प्राप्ति तथा साक्षात्कार में सफलता हेतु मंत्र-

गुरु गृह गए पढ़न रघुराई।
अल्प काल विद्या सब पाई।।
 रोजी-रोजगार, प्रमोशन, बंद धंधा चलाने का मंत्र 1008 बार पढ़कर 108 आहुति डालें तथा होली के दिन से नित्य चींटियों को आटा-शकर-घी मिलाकर सवेरे पढ़ते हुए चींटियों के बिल पर डालते जाएं। ऐसा 40 दिन करें, सफलता निश्चित मिलेगी।

मंत्र- ' नमो नगर चींटी महावीर हूं
पूरों तोरी आशा तूं पूरो मोरी आशा।।
 व्यापार में घाटा होने पर निम्न मंत्र होली की रात्रि में 1008 बार जपकर 108 आहुति दें तथा नित्य प्रात: एक माला जपें, निश्चित लाभ होगा।

मंत्र-
ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं श्रीमेव कुरु-कुरु
वांछित मेव ह्रीं ह्रीं नम:।।

No comments:

Post a Comment