सरबाला-सरबाली :
मेंहदी की रस्म विवाह के कुछ दिन
पूर्व किए जाने की परंपरा का शास्त्रों में उल्लेख है
तथा मेंहदी लग जाने के बाद घर से न निकलने
का भी प्रावधान है। इसके
अलावा मेंहदी लग जाने के बाद से
ही तुरंत वर और वधू दोनों के ही साथ
उनके निकटतम मित्र और सखी या फिर कोई समान
आयु का निकटतम रिश्तेदार निरंतर साथ बना रहने का उल्लेख
शास्त्रों में किया गया है। ऎसा पहले
भी किया जाता था कि सरबाला-
सरबाली (रिश्तेदार या मित्र जो साथ रहता है) होते
थे और आज भी यह प्रथा जारी है।
इसके पीछे भी कोई
रूढि़ या दकियानूसी धारणा नहीं है
बल्कि ऎसा इसलिए किया जाता है कि यदि कोई नकारात्मक
शक्ति उस समय वहां है तो वह शक्ति संशय में रहे और
वास्तविक वर-वधू
को किसी भी नकारात्मक प्रभाव से
बचाया जा सके। यद्यपि आज
मेंहदी की रस्म घर में कम और
ब्यूटी पार्लर में भी अधिक
निभायी जाती है परंतु इस बात का ध्यान
रखा जाना चाहिए कि मेंहदी लगने के बाद वधू को घर
से बाहर न निकलने दिया जाए।
मेंहदी की रस्म विवाह के कुछ दिन
पूर्व किए जाने की परंपरा का शास्त्रों में उल्लेख है
तथा मेंहदी लग जाने के बाद घर से न निकलने
का भी प्रावधान है। इसके
अलावा मेंहदी लग जाने के बाद से
ही तुरंत वर और वधू दोनों के ही साथ
उनके निकटतम मित्र और सखी या फिर कोई समान
आयु का निकटतम रिश्तेदार निरंतर साथ बना रहने का उल्लेख
शास्त्रों में किया गया है। ऎसा पहले
भी किया जाता था कि सरबाला-
सरबाली (रिश्तेदार या मित्र जो साथ रहता है) होते
थे और आज भी यह प्रथा जारी है।
इसके पीछे भी कोई
रूढि़ या दकियानूसी धारणा नहीं है
बल्कि ऎसा इसलिए किया जाता है कि यदि कोई नकारात्मक
शक्ति उस समय वहां है तो वह शक्ति संशय में रहे और
वास्तविक वर-वधू
को किसी भी नकारात्मक प्रभाव से
बचाया जा सके। यद्यपि आज
मेंहदी की रस्म घर में कम और
ब्यूटी पार्लर में भी अधिक
निभायी जाती है परंतु इस बात का ध्यान
रखा जाना चाहिए कि मेंहदी लगने के बाद वधू को घर
से बाहर न निकलने दिया जाए।
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