ज्योतिष में पैर-शनि का और सूर्य-सिर का प्रतीक है
और ये परस्पर शत्रु माने जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य
का सिर ठंडा और पैर गर्म रहने चाहिएं। इसलिए सिर पर
सोना और पैरों में चांदी के आभूषण
ही धारण करने चाहिएं। इससे सिर से उत्पन्न
ऊर्जा पैरों में और चांदी से उत्पन्न ठंडक सिर में
जाएगी। इससे सिर ठंडा व पैर गर्म रहेंगे। सिर में
चांदी के व पैरों में सोने के आभूषण
नहीं पहनने चाहिएं। इससे स्त्रियां अवसाद,
पागलपन या अन्य रोगों की शिकार बन
सकती हैं। पैरों में सोने की पायल
नहीं पहननी चाहिए,
चांदी की पायल पहनने से
पीठ, एड़ी व घुटनों के दर्द, रक्तशुद्धि,
मूत्ररोग, हिस्टीरिया आदि रोगों से राहत
मिलती है।
और ये परस्पर शत्रु माने जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य
का सिर ठंडा और पैर गर्म रहने चाहिएं। इसलिए सिर पर
सोना और पैरों में चांदी के आभूषण
ही धारण करने चाहिएं। इससे सिर से उत्पन्न
ऊर्जा पैरों में और चांदी से उत्पन्न ठंडक सिर में
जाएगी। इससे सिर ठंडा व पैर गर्म रहेंगे। सिर में
चांदी के व पैरों में सोने के आभूषण
नहीं पहनने चाहिएं। इससे स्त्रियां अवसाद,
पागलपन या अन्य रोगों की शिकार बन
सकती हैं। पैरों में सोने की पायल
नहीं पहननी चाहिए,
चांदी की पायल पहनने से
पीठ, एड़ी व घुटनों के दर्द, रक्तशुद्धि,
मूत्ररोग, हिस्टीरिया आदि रोगों से राहत
मिलती है।
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