Friday, May 9, 2014

ग्रहण योग

ग्रहण योग: कुंडली में
कहीं भी सूर्य अथवा चन्द्र
की युति राहू या केतु से हो जाती है
तो इस दोष का निर्माण होता है.चन्द्र ग्रहण योग
की अवस्था में जातक डर व घबराहट महसूस
करता है.चिडचिडापन उसके स्वभाव का हिस्सा बन जाता है.माँ के
सुख में
कमी आती है.किसी भी कार्य
को शुरू करने के बाद उसे सदा अधूरा छोड़ देना व नए काम के बारे में
सोचना इस योग के लक्षण हैं.अमूमन
किसी भी प्रकार के
फोबिया अथवा किसी भी मानसिक
बीमारी जैसे डिप्रेसन ,सिज्रेफेनिया,आ
दि इसी योग के कारण माने गए
हैं.यदि यहाँ चंद्रमा अधिक दूषित हो जाता है या कहें अन्य
पाप प्रभाव में
भी होता है,तो मिर्गी ,चक्कर व
मानसिक संतुलन खोने का डर भी होता है. सूर्य
द्वारा बनने वाला ग्रहण योग पिता सुख में
कमी करता है.जातक का शारीरिक
ढांचा कमजोर रह जाता है.आँखों व ह्रदय
सम्बन्धी रोगों का कारक
बनता है.सरकारी नौकरी या तो मिलती नहीं या उस
में निबाह मुस्किल होता है.डिपार्टमेंटल
इन्क्वाइरी ,सजा ,जेल,परमोशन में रुकावट सब
इसी योग का परिणाम है.

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